ठाणे में बिजनेसमैन के किडनैपिंग का मास्टरमाइंड निकला परिचित (Image- Bharat Express)
रिपोर्ट- अभिषेक
Ulhasnagar Kidnapping Case: महाराष्ट्र के ठाणे में एक कारोबारी के अपहरण और 50 लाख रुपये की फिरौती मांगने के मामले में उल्हासनगर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने आरोपियों से 50 लाख रुपये की रिकवरी किए जाने की जानकारी दी है. गिरफ्तार आरोपियों को अदालत में पेश कर पुलिस कस्टडी की मांग की गई है. वहीं इस मामले में दो आरोपी अभी भी फरार बताये जा रहे हैं.
पुलिस के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों तक पहुंचने के लिए 10 अलग-अलग पुलिस टीमों का गठन किया गया था. पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी जानकारी और आरोपियों की गतिविधियों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई. जांच के दौरान पुलिस की टीमें खडवली इलाके तक पहुंचीं और स्थानीय नागरिकों की मदद से तलाशी अभियान चलाया गया. इसी दौरान अपहृत जयराम नेहलानी का ठिकाना पता चला और उन्हें सुरक्षित मुक्त कराया गया.
ऐसे दिया घटना को अंजाम
जांच में पुलिस के सामने आया कि नेहलानी के परिचित और एस्टेट एजेंट सचिन शिरसाट ने कुछ युवकों के साथ मिलकर कथित तौर पर अपहरण की साजिश रची थी. घटना के बाद शिरसाट फरार हो गया था, लेकिन पुलिस ने तलाश कर उसे भी गिरफ्तार कर लिया.

इस मामले में अनिल जगताप, विशाल चंद्रमोरे, रमेश जाधव, सचिन शिरसाट और राहुल सोनी को गिरफ्तार किया गया है. वहीं सतीश दोंदे और मयूर दराने फरार बताए जा रहे हैं. पुलिस की टीमें दोनों की तलाश में जुटी हैं. पुलिस के मुताबिक मुख्य आरोपियों के खिलाफ पहले भी मामले दर्ज हैं.
एसीपी के नेतृत्व में जांच
मामले की आगे की जांच एसीपी के नेतृत्व में की जा रही है. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि अपहरण के पीछे केवल आर्थिक विवाद था या इसके पीछे कोई अन्य वजह भी थी. साथ ही फिरौती की रकम और इस साजिश में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है.

डीसीपी सचिन गोरे ने बताया कि अपहरण की शिकायत मिलते ही उल्हासनगर पुलिस ने जांच तेज कर दी थी. आरोपियों तक पहुंचने के लिए 10 अलग-अलग पुलिस टीमों का गठन किया गया. सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी जानकारी और आरोपियों की गतिविधियों के आधार पर जांच की गई. पुलिस ने अपहृत व्यक्ति को सुरक्षित मुक्त कराया है. मामले में सात आरोपियों में से पांच को गिरफ्तार किया जा चुका है और 50 लाख रुपये की रिकवरी हुई है.
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उन्होंने आगे बताया कि मुख्य दो आरोपियों के खिलाफ पहले भी मामले दर्ज हैं. मामले की जांच एसीपी के नेतृत्व में जारी है और फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है. सचिन गोरे ने कहा कि आरोपियों के पिछले आपराधिक रिकॉर्ड और मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका/MCOCA) के तहत कार्रवाई गई है.
-भारत एक्सप्रेस
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