Bharat Express DD Free Dish
Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital
Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital

प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 पर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट अप्रैल के पहले सप्ताह में करेगा सुनवाई

प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट अप्रैल के पहले सप्ताह में सुनवाई करेगा. केंद्र सरकार से जवाब मांगा गया है और कोर्ट ने नई याचिकाओं को स्वीकार न करने का निर्देश दिया है.

Supreme Court
Aarika Singh Edited by Aarika Singh

प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 को लेकर दायर विभिन्न याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट अप्रैल के पहले सप्ताह में सुनवाई करेगा. सीजेआई संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री को निर्देश दिया है कि अब नई याचिका को स्वीकार ना करें. कोर्ट ने दाखिल नई याचिकाओं पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

वही सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की ओर से पेश वकीलों ने कोर्ट से मांग की है कि अब नई याचिका का स्वीकार ना किया जाए. कोर्ट ने कहा कि पिछले आठ बार से केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया गया है, उन्हें जवाब दाखिल करना चाहिए. याचिकाकर्ताओं में से एक अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने कोर्ट से केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए अंतिम मौका देने की मांग की, लेकिन कोर्ट ने इसको लेकर कोई आदेश नही दिया.

AIMIM चीफ ने चौधरी सहित अन्य की ओर से याचिका की दायर

प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 के खिलाफ विश्वभद्र पुजारी पुरोहित महासंघ, डॉक्टर सुब्रमण्यम स्वामी, अश्विनी कुमार उपाध्याय, करुणेश कुमार शुक्ला और अनिल त्रिपाठी ने दायर की है. दूसरी ओर ज्ञानवापी मस्जिद मैनेजमेंट कमिटी, AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी, सांसद इकरा चौधरी सहित अन्य की ओर से पक्ष में याचिका दायर की गई है. दायर हस्तक्षेप याचिका दायर कर कहा है कि याचिकाकर्ता द्वारा प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट को असंवैधानिक घोषित करने की मांग के परिणाम गंभीर और दूरगामी होंगे.

याचिकाकर्ता ने यह भी कहा है कि वह इस तरह के कई मामलों में दाखिल सूट में पक्षकार है और एक हितधारक है. उनकी ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि कई मुकदमे दायर किए गए हैं, जो 1991 अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत निषेध के बावजूद मस्जिद को हटाने का दावा करते है और उन तमाम मामलों में वह पक्षकार है. एक्ट की धारा -3 के मुताबिक किसी भी पूजा स्थल को किसी अन्य पूजा स्थल में परिवर्तित करने पर प्रतिबंध लगाता है.

वहीं धारा-4 कहता है कि 15 अगस्त 1947 को पूजा स्थल का जो धार्मिक स्वरूप जैसा था, वैसा ही बना रहेगा. प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 पीवी नरसिम्हा राव की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार 1991 में लेकर आई थी. इस कानून के जरिए किसी भी धार्मिक स्थल की प्रकृति यानी वहमस्जिद है मंदिर या फिर चर्च-गुरुद्वारा, यह निर्धारित करने को लेकर नियम बनाए गए है.

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital