पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद से ही लगातार अंदरूनी कलह और गुटबाजी से जूझ रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अंदर एक बार फिर बहुत बड़ा ‘खेला’ हो गया है. पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हालिया हमलों व आंतरिक बगावत के बीच, अब खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी ही पार्टी के दो कद्दावर विधायकों पर कड़ा चाबुक चलाते हुए उन्हें पार्टी से सस्पेंड (निष्कासित) कर दिया है.
फर्जी हस्ताक्षर करने के गंभीर मामले में हुई इस ताबड़तोड़ कार्रवाई (TMC MLA Suspend) के बाद बंगाल की सियासत में भूचाल आ गया है. इसे पार्टी के भीतर पनप रही बगावत को कुचलने के लिए ममता बनर्जी का एक बड़ा ‘क्लीनअप ऑपरेशन’ माना जा रहा है.
फर्जी हस्ताक्षर मामले में फंसे माननीय(TMC MLA Suspend)
पार्टी सूत्रों से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, जिन दो विधायकों को तृणमूल कांग्रेस से बाहर का रास्ता दिखाया गया है, उनमें ऋतोब्रता बनर्जी और संदीपान साहा के नाम शामिल हैं. ऋतोब्रता बनर्जी उलुबेरिया पूर्व (Uluberia Purba) से टीएमसी के विधायक हैं, जबकि संदीपान साहा एंटाली (Entally) विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं.
इन दोनों पर एक बेहद महत्वपूर्ण पार्टी प्रस्ताव में नेताओं के फर्जी हस्ताक्षर करने और अनुशासनहीनता फैलाने का गंभीर आरोप है. ममता बनर्जी के इस कड़े फैसले ने साफ कर दिया है कि पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त किसी भी नेता को अब बख्शा नहीं जाएगा.
सस्पेंड होते ही संदीपन साहा ने खोला मोर्चा
पार्टी से निकाले जाने के तुरंत बाद विधायक संदीपान साहा ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही कथित गड़बड़ियों और तानाशाही को लेकर मीडिया के सामने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. साहा ने आरोप लगाया कि पार्टी की बैठकों में एक बहुत बड़ा फर्जीवाड़ा चल रहा है.
उन्होंने दावा किया कि पार्टी के आधिकारिक प्रस्ताव में उन लोगों के भी हस्ताक्षर शामिल किए गए, जो उस बैठक में मौजूद ही नहीं थे. उन्होंने इसे एक अक्षम्य गलती बताते हुए कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और शीर्ष स्तर पर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए.
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अभिषेक पर हमले के बाद खुद संभाली कमान
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि टीएमसी में यह बगावत कोई नई नहीं है, इससे पहले भी कई बड़े नेता और जमीनी कार्यकर्ता पार्टी का साथ छोड़ चुके हैं. हाल ही में सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले में भी टीएमसी के ही पूर्व विधायक लवली मैत्रा के करीबियों का नाम सामने आया था, जिससे पार्टी के अंदर चल रही गुटबाजी पूरी तरह बेनकाब हो गई थी.
सांसद अभिषेक बनर्जी जब ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत विदेशों में भारत का पक्ष रख रहे थे, तब से ही बंगाल में उनके विरोधी गुट सक्रिय थे. ऐसे में और ज्यादा बगावत फैलने के डर से खुद ममता बनर्जी ने कमान अपने हाथ में ली है और बागी सुर अख्तियार करने वाले नेताओं को बाहर का रास्ता (TMC MLA Suspend) दिखाना शुरू कर दिया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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