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गृह मंत्री अमित शाह ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब की शिक्षाओं पर क्या कहा?

सिख धर्म के सबसे पवित्र और महान उत्सव श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के प्रकाश पर्व पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हिंदी और पंजाबी दोनों भाषाओं में शुभकामनाएं देते हुए मानव कल्याण के उस शाश्वत संदेश को याद किया है.

Union Home Minister Amit Shah extending warm greetings on the auspicious occasion of Sri Guru Granth Sahib Ji Prakash Parv, highlighting the eternal values of truth, service, and equality

सिख धर्म के सबसे पावन और ऐतिहासिक उत्सव श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर आज देश-विदेश के गुरुद्वारों में विशेष रौनक देखने को मिल रही है. इस पवित्र दिन पर केंद्रीय एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सिख समुदाय और समस्त मानवता को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं. गृह मंत्री ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर हिंदी और पंजाबी दोनों भाषाओं में संदेश साझा कर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की शिक्षाओं के महत्व को रेखांकित किया है.

‘ज्ञान, सत्य और सिद्धांतों से होता है जीवन का सच्चा मार्गदर्शन’

अपने संदेश में गृह मंत्री अमित शाह ने लिखा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के प्रकाश पर्व की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं. श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को ‘गुरु’ का दर्जा देकर श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने यह संदेश दिया कि जीवन का सच्चा मार्गदर्शन ज्ञान, सत्य व सिद्धांतों से होता है. उन्होंने आगे कहा कि इस पवित्र ग्रंथ में सेवा, त्याग, समानता, करुणा और मानवता की ऐसी अमूल्य शिक्षाएं समाहित हैं, जो सदैव समाज को मानव कल्याण के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती रहेंगी.

क्या है प्रकाश पर्व का ऐतिहासिक महत्व?

श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश पर्व वर्ष 1604 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर (श्री हरमंदिर साहिब) में ‘आदि ग्रंथ’ के प्रथम प्रकाश (स्थापना) की स्मृति में मनाया जाता है. पांचवें सिख गुरु श्री गुरु अर्जन देव जी ने विभिन्न गुरुओं, संतों और भक्तों की वाणियों का संकलन कर आदि ग्रंथ की रचना की थी. इसके बाद, दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने इसमें गुरु तेग बहादुर जी की बाणी को जोड़कर इसे अंतिम रूप दिया.

वर्ष 1708 में नांदेड़ में इसे शाश्वत गुरु घोषित किया गया और तभी से सिख समुदाय श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को जीवित गुरु मानता है. “आज्ञा भई अकाल की, तभी चलायो पंथ. सब सिखनों को हुक्म है, गुरु मान्यो ग्रंथ”—यह ऐतिहासिक उद्घोष आज भी हर सिख के हृदय में गूंजता है.

मानवता के लिए प्रासंगिक हैं गुरु साहिब की शिक्षाएं

अमित शाह के संदेश में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की शिक्षाएं किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए प्रासंगिक हैं. आज के इस आधुनिक युग में भी सेवा, लंगर की परंपरा और भाईचारे के ये मूल्य भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में सामाजिक सद्भाव को और अधिक मजबूत करते हैं.



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