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UIICL में धोखाधड़ी कर 62 लाख की बीमा राशि हड़पने वाले तीन दोषियों को पांच साल की कठोर सजा, ₹35.30 लाख का जुर्माना भी

अहमदाबाद की विशेष CBI अदालत ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी में 2004 के बीमा धोखाधड़ी मामले में तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए पांच साल की सजा और ₹35.30 लाख जुर्माना सुनाया.

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की जांच के बाद यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (UIICL) में बीमा धोखाधड़ी के एक पुराने मामले में अहमदाबाद स्थित सीबीआई मामलों की विशेष अदालत ने तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए पांच-पांच साल की कठोर कारावास और कुल ₹35.30 लाख के जुर्माने की सजा सुनाई है.

दोषियों में UIICL सिलवासा ब्रांच के तत्कालीन सहायक किकुभाई एस. ढोड़ी, और दो निजी व्यक्ति वसंतभाई के. पटेल व अपूर्व पटेल शामिल हैं. कोर्ट ने इन्हें आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों के उपयोग जैसे गंभीर अपराधों में दोषी पाया.

बीमा दावों की साजिश से सरकारी कंपनी को भारी नुकसान

CBI ने यह मामला 31 दिसंबर 2004 को दर्ज किया था. जांच में सामने आया कि इन तीनों सहित कुल 20 लोगों (सरकारी व निजी) ने मिलकर फर्जी बीमा दावे तैयार कर UIICL को लगभग ₹62 लाख का नुकसान पहुँचाया. इनमें 10 फर्जी फायर इंश्योरेंस दावे शामिल थे, जिनमें दावा किया गया कि चारे (घास) के स्टॉक में आग लग गई थी.

सर्वे रिपोर्ट और भुगतान में धोखाधड़ी

जांच में स्पष्ट हुआ कि केवल एक दावा ही गलत तरीके से पास किया गया, जो वसंतभाई पटेल का था. इसमें ₹8,97,300 की बीमा राशि दी गई थी. इस फर्जी दावे की सर्वे रिपोर्ट अपूर्व पटेल ने तैयार की थी. भुगतान वसंत पटेल द्वारा साइन किए गए बियरर चेक से निकाला गया, लेकिन हस्तलिपि विश्लेषण में पाया गया कि हस्ताक्षर UIICL के सहायक और वसंत पटेल के साले किकुभाई ढोड़ी के थे. सर्वे और निरीक्षण रिपोर्ट दोनों ही फर्जी साबित हुईं.

न्यायालय का निर्णय

CBI ने 31 दिसंबर 2007 को इन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. मुकदमे के बाद, विशेष सीबीआई अदालत (कोर्ट नं. 06, अहमदाबाद) ने आज तीनों को दोषी मानते हुए पांच वर्षों की कठोर कैद और ₹35.30 लाख के कुल जुर्माने की सजा सुनाई.

यह फैसला उन सभी के लिए एक सख्त संदेश है जो सरकारी संस्थानों और बीमा कंपनियों को धोखा देकर अनुचित लाभ उठाना चाहते हैं. CBI इस मामले में अपनी जांच को लेकर प्रतिबद्ध रही और वर्षों बाद भी न्याय दिलाने में सफल रही.

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-भारत एक्सप्रेस 



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