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बिहार मॉडल से यूपी में एंट्री: तावड़े के हाथ में बीजेपी की कमान, सत्ता विरोधी लहर को देंगे मात?

UP Assembly Election: यूपी चुनाव 2027 में बीजेपी ने बड़ा दांव खेला है. सीएम योगी का चेहरा और विनोद तावड़े का मैनेजमेंट मिलकर क्या सत्ता विरोधी लहर को रोक पाएंगे?

फोटो क्रेडिट @TawdeVinod

UP Assembly Election: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने बड़ा दांव खेला है. पार्टी ने विनोद तावड़े को यूपी का चुनाव प्रभारी बनाया है. तावड़े का मैनेजमेंट बिहार में सफल रहा था और अब सवाल यह है कि क्या वही रणनीति यूपी की 403 सीटों पर सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) को मात देने में कारगर साबित होगी.

बिहार मॉडल से यूपी में एंट्री

विनोद तावड़े ने बिहार चुनावों में बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने और जातीय समीकरणों को साधने में अहम भूमिका निभाई थी. उनका फोकस माइक्रो मैनेजमेंट पर रहता है. कहा जाए तो मतलब हर विधानसभा क्षेत्र में अलग-अलग रणनीति. अब यूपी में भी वे इसी फार्मूले को लागू करने की तैयारी में हैं.

सीएम योगी का चेहरा और तावड़े का दिमाग

बीजेपी यूपी में सीएम योगी को चेहरा बनाकर चुनावी मैदान में उतर रही है. वहीं अनुमान ये भी लगाया जा रहा है कि पर्दे के पीछे चुनावी मैनेजमेंट की कमान तावड़े के हाथ में होगी. सीएम योगी की लोकप्रियता और तावड़े की रणनीति का मेल बीजेपी को सत्ता विरोधी लहर से बचाने का सबसे बड़ा हथियार माना जा रहा है.

बूथ स्तर पर पकड़

अब सवाल ये भी बन रहा है कि विनोद तावड़े का मुख्य फोकस कहा होगा? तावड़े का सबसे बड़ा फोकस बूथ मैनेजमेंट पर होगा. बिहार में उन्होंने हर बूथ पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया था. यूपी में भी वे यही रणनीति अपनाने वाले हैं. हर विधानसभा क्षेत्र में बूथ प्रभारी और सेक्टर प्रभारी की नियुक्ति कर संगठन को मजबूत किया जाएगा.

जातीय समीकरणों पर नजर

यह किसी से छिपा नहीं है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति किस मुद्दे पर टिकी है. प्रदेश की राजनीति जातीय समीकरणों पर टिकी रहती है. तावड़े का मैनेजमेंट इस पहलू को ध्यान में रखकर काम करेगा. यादव, दलित, ब्राह्मण और पिछड़े वर्गों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश होगी. इसके लिए अलग-अलग जिलों में अलग-अलग रणनीति बनाई जाएगी.

सत्ता विरोधी लहर से निपटने की तैयारी

बीजेपी को इस बार सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ सकता है. तावड़े का मैनेजमेंट इस चुनौती से निपटने के लिए नए फार्मूले पर काम कर रहा है. इसमें स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता देना, विकास कार्यों को सामने लाना और विपक्षी दलों की कमजोरियों को उजागर करना शामिल है.

सोशल मीडिया और डिजिटल कैंपेन

तावड़े डिजिटल कैंपेनिंग में भी माहिर माने जाते हैं. बिहार में उन्होंने सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर युवा वोटरों को साधा था. यूपी में भी वे फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बीजेपी की मौजूदगी को मजबूत करने की योजना जरूर बना सकते हैं.

विपक्ष पर नजर

तावड़े की रणनीति में विपक्ष की कमजोरियों को भुनाना भी शामिल है. यूपी में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की स्थिति को देखते हुए बीजेपी विपक्षी खेमे की खामियों को उजागर कर अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश करेगी.

संगठन और सरकार का तालमेल

तावड़े का मैनेजमेंट संगठन और सरकार के बीच तालमेल पर जोर देता है. यूपी में योगी सरकार के कामकाज को चुनावी मुद्दों से जोड़कर जनता तक पहुंचाने की योजना बनाई जाएगी. इससे बीजेपी को सत्ता विरोधी लहर का असर कम करने में मदद मिल सकती है.

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योगी आदित्यनाथ का चेहरा और विनोद तावड़े का मैनेजमेंट बीजेपी के चुनावी रणनीति का यही नया फॉर्मूला है. बिहार में सफल रहा तावड़े का माइक्रो मैनेजमेंट अब यूपी की 403 सीटों पर परखा जाएगा. सत्ता विरोधी लहर से निपटने के लिए बीजेपी इस बार पूरी तरह से संगठन और रणनीति पर भरोसा कर रही है.

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-भारत एक्सप्रेस



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