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Waqf Amendment Bill पर संसद में सियासत,  बोले- गृह मंत्री कांग्रेस ने 1986 में शाहबानो केस में घुटने टेक दिए थे

Waqf Amendment Bill 2025: वक्फ संशोधन विधेयक 2025 लोकसभा में पेश किया गया, जिससे तीखी बहस छिड़ गई; सरकार इसे पारदर्शिता के लिए जरूरी बता रही है, जबकि विपक्ष इसे मुस्लिम विरोधी एजेंडा करार दे रहा है.

Waqf Amendment Bill 2025

Waqf Amendment Bill 2025: लोकसभा में सोमवार को वक्फ संशोधन विधेयक 2025 पेश किया गया. केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरण रिजिजू ने यह विधेयक पेश किया. उन्होंने कहा कि अगर यह संशोधन नहीं लाया जाता, तो संसद भवन भी वक्फ संपत्ति घोषित हो सकता था. साथ ही उन्होंने विपक्षी दलों ने इस बिल का विरोध करते हुए सरकार पर अल्पसंख्यकों के खिलाफ एजेंडा चलाने का आरोप लगाया, जिससे संसद में तीखी बहस छिड़ गई. वहीं गृह मंत्री अमित शाह कहा कि हमारी संसदीय समिति कांग्रेस की तरह नहीं, जो बिना बहस के ठप्पा लगा देती थी आइए बताते हैं वक्फ संशोधन विधेयक 2025 को लेकर सत्ता पर पक्ष और विपक्ष के सांसदों ने क्या प्रक्रिया दी.

किरण रिजिजू ने संसद में बताया कि इस विधेयक को पारदर्शिता लाने और वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकने के लिए लाया गया है. उन्होंने कहा कि 2013 में दिल्ली वक्फ बोर्ड ने संसद भवन को वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया था. तत्कालीन यूपीए सरकार ने इसे डिनोटिफाई किया. यदि मोदी सरकार यह संशोधन नहीं लाती, तो संसद जैसे न जाने कितनी और संपत्तियां इसी तरह वक्फ बोर्ड की घोषित हो जातीं.

इस विधेयक पर विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया. कांग्रेस, टीएमसी, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया कि यह बिल मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने के लिए लाया गया है. रिजिजू ने आगे बताया कि इस बिल पर 284 अलग-अलग डेलीगेशन, 25 राज्यों के वक्फ बोर्ड, नीति-निर्माताओं और विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए हैं.

मुस्लिम समुदाय की जमीन पर बीजेपी की नजर-अखिलेश यादव

वक्फ संशोधन विधेयक 2025 को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और संसद अखिलेश यादव ने बिल का विरोध किया. उन्होंने कहा कि वक्फ संशोधन बिल बीजेपी के लिए  ‘वाटरलू’ साबित होगा. यह सरकार महंगाई और बेरोजगारी से ध्यान भटकाने के लिए वक्फ संपत्तियों को हथियाने का प्रयास कर रही है. बीजेपी चाहती है कि मुस्लिम समुदाय में फूट डाली जाए और उनकी जमीनें अपने लोगों को दी जाएं. साथ ही उन्होंने इस बिल को भाजपा के नाकामी का पर्दा बताया.

कांग्रेस और टीएमसी ने क्या कहा?

कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि इस बिल में विपक्ष के सुझावों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया. न तो संशोधनों पर चर्चा हुई और न ही पर्याप्त समय दिया गया. टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि यह विधेयक अल्पसंख्यकों के खिलाफ है. इससे वक्फ संपत्तियों की स्वतंत्रता खत्म हो जाएगी. टीएमसी इस बिल का पुरजोर विरोध करेगी और सरकार को इसे वापस लेना चाहिए.

सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि सरकार इस संशोधन के जरिए राज्य सरकारों की शक्तियां छीनना चाहती है. वक्फ बोर्डों को राज्यों के अधिकार क्षेत्र से हटाकर केंद्र सरकार के नियंत्रण में लाने की योजना बनाई जा रही है. इससे वक्फ संपत्तियों पर कानूनी विवाद बढ़ेंगे और भाईचारे का माहौल बिगड़ेगा.”

वक्फ संपत्तियों की लूट को रोकना जरूरी- BJP

बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि देश में 8 लाख से अधिक वक्फ संपत्तियां हैं. लेकिन सवाल यह है कि कितने अस्पताल, स्कूल या महिला कल्याण केंद्र इन संपत्तियों पर बनाए गए? वक्फ संपत्तियों के नाम पर लूट हो रही है और हम इसे रोकना चाहते हैं.

रविशंकर प्रसाद ने यह भी कहा कि क्या मुस्लिमों के आदर्श सिर्फ वोट बैंक की राजनीति करने वाले नेता होंगे? या फिर मौलाना आजाद, अब्दुल कलाम, अब्दुल हमीद और अशफाक उल्ला खान जैसे लोग? जब मोहम्मद शमी किसी टीम के खिलाड़ी को आउट करता है या सानिया मिर्जा जीतती हैं, तो पूरा देश खुश होता है. हमें भी पारदर्शिता और नियमों का पालन करना होगा.

हमारी संसदीय समिति कांग्रेस जैसी नहीं- गृह मंत्री अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस विधेयक पर चर्चा करते हुए कहा कि हमारी संसदीय समिति कांग्रेस की तरह नहीं, जो बिना बहस के ठप्पा लगा देती थी. हमारी कमेटी गहन चर्चा करती है और सभी मुद्दों को ध्यान में रखती है. उन्होंने कहा कि कि कांग्रेस ने 1986 में शाहबानो केस में घुटने टेक दिए थे, जिसके बाद से उसे कभी पूर्ण बहुमत नहीं मिला. मोदी सरकार ने अनुच्छेद 370 हटाया, तीन तलाक खत्म किया और अब वक्फ संपत्तियों में पारदर्शिता लाने का काम कर रही है. विपक्ष को यह रास नहीं आ रहा.

विधेयक पर 8 घंटे की चर्चा, वोटिंग आज देर रात तक संभव

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस विधेयक पर चर्चा के लिए 8 घंटे का समय तय किया है. अगर जरूरत पड़ी तो समय बढ़ाया भी जा सकता है. विधेयक पर आज देर रात तक वोटिंग होने की संभावना है. यदि यह लोकसभा में पारित हो जाता है, तो इसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा. इस बीच, संसद के अंदर और बाहर इस मुद्दे पर सियासत और गरमाने की संभावना है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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