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पत्रकारिता नहीं राजनीति कर रहा है वॉशिंगटन पोस्ट? LIC पर हमले के पीछे हताश सियासी एजेंडा

Washington Post Agenda On LIC: बिहार में चुनाव चल रहे हैं. इस बीच भारतीय जीवन बीमा निगम पर वाशिंगटन पोस्ट, अदाणी ग्रुप में निवेश करने को लेकर कई आरोप लगा रहा है. जबकि, LIC ने 120 फीसदी की प्रॉफिट दर्ज की है. ऐसे में वाशिंगटन पोस्ट की पत्रकारिता पर सवाल उठना लाजमी है.

Question Over Washington Post journalism On LIC Adani Investment Report

Washington Post Agenda On LIC: कभी दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित अखबारों में गिना जाने वाला वॉशिंगटन पोस्ट आज भारत में अपनी विश्वसनीयता के सबसे गहरे संकट का सामना कर रहा है. जिस संस्था ने वॉटरगेट स्कैंडल जैसे मामलों में सत्य को उजागर किया वही अब भारत के बढ़ते आर्थिक उदय और LIC जैसे अडिग भरोसे के प्रतीक को निशाना बना रही है. करोड़ों भारतीयों के सपनों और सुरक्षा का प्रतीक LIC पर 1956 से भरोसा टिका है. ऐसे में वॉशिंगटन पोस्ट का अदाणी ग्रुप को कथित ‘मदद’ का आरोप लगाना सिर्फ एक कॉरपोरेट हमला नहीं, बल्कि भारतीय आत्मविश्वास पर हमला लगता है. बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बेबुनियाद रिपोर्ट प्रकाशित करना उसके सियासी एजेंडे को साफ जाहिर कर रहा है. ऐसे में उसकी पत्रकारिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.

वॉशिंगटन पोस्ट (Washington Post) जैसे विदेशी मीडिया द्वारा विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ऐसी अटकलों पर आधारित रिपोर्ट प्रकाशित करना उन पत्रकारों की हताश राजनीतिक चाल लगती है, जिनके नेता पिछले दस वर्षों से चुनावी मैदान में सिर्फ़ हार ही देख रहे हैं. अक्टूबर 2025 में प्रकाशित रिपोर्ट ‘India’s $3.9 billion plan to help Modi’s mogul ally after U.S. charges’ इसका ताज़ा उदाहरण है. रिपोर्ट में दावा किया गया कि भारत सरकार, वित्त मंत्रालय और एलआईसी ने मिलकर अडाणी ग्रुप को 33,000 करोड़ की मदद पहुंचाई. रिपोर्ट में कई अज्ञात सूत्रों का हवाला दिया गया, लेकिन किसी ठोस दस्तावेज या स्वतंत्र सत्यापन का जिक्र नहीं था.

भ्रामक और मनगढ़ंत रिपोर्ट

भारत सरकार, एलआईसी और अडाणी ग्रुप तीनों ने तुरंत इसे ‘भ्रामक और मनगढ़ंत’ बताया. एलआईसी ने स्पष्ट किया कि उसका अडाणी कंपनियों में निवेश कुल पोर्टफोलियो का एक प्रतिशत भी नहीं है, और उस निवेश पर उसे 120% से अधिक का लाभ मिला. भारतीय मीडिया ने भी इस रिपोर्ट को ‘हिट जॉब’ कहा. वैसे ही जैसे 2023 में हिंडनबर्ग रिपोर्ट ने भारत की कंपनियों और बाज़ार को निशाना बनाया था. सोशल मीडिया पर #FakeNewsWaPo और #StopTargetingIndia जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे.

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पहले भी Washington Post पर लगे हैं आरोप

  • जून 2025 में अखबार ने गाज़ा पर एक रिपोर्ट का हिस्सा वापस लिया जिसमें इसराइली सेना पर नागरिकों की मौत का गलत आरोप लगाया गया था. बाद में अखबार ने माना कि हेडलाइन और रिपोर्ट ‘तथ्यों का निष्पक्ष प्रतिनिधित्व नहीं कर रही थी.’
  • जुलाई 2025 में उसे भारत के चैनल टीवी9 भारतवर्ष से माफी मांगनी पड़ी, क्योंकि उसने पाकिस्तान को लेकर एक रिपोर्ट में व्हाट्सऐप संदेशों की गलत व्याख्या और भारतीय मीडिया की गलत प्रस्तुति की थी.
  • 2019 में एक लेख जो अमेरिका के दक्षिणी राज्यों में अश्वेत परिवारों की जमीन से जुड़ा था. इसमें 15 बड़ी त्रुटियां पाई गईं. नाम, तारीख, और घटनाओं तक गलत थे. अखबार ने खुद इसे ‘शर्मनाक’ कहा.
  • 2021 में उसने डोनाल्ड ट्रंप पर प्रकाशित एक रिपोर्ट सुधारी, जिसमें कथित तौर पर उन्होंने ‘Find the fraud’ कहा था लेकिन बाद में जारी ऑडियो में यह बात झूठी साबित हुई.
  • साल 2021 के नवंबर में स्टील डॉसियर से जुड़ी दो रिपोर्ट हटाई गईं क्योंकि उनके स्रोत ‘कम विश्वसनीय’ पाए गए.

राजनीतिक एजेंडे का मंच बना

ऐसे उदाहरणों के बाद जब वॉशिंगटन पोस्ट (Washington Post) भारत की सरकारी संस्थाओं पर आरोप लगाता है, तो पाठकों में शक पैदा होना स्वाभाविक है. भारतीयों को लगता है कि यह अखबार अब निष्पक्ष पत्रकारिता से ज़्यादा राजनीतिक एजेंडे का मंच बन गया है. भारत में स्वतंत्र मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए लोग आज खुद तथ्यों की जांच करने लगे हैं. विदेशी अखबारों का प्रभाव वैसा नहीं रहा जैसा कभी था. इसलिए जब वॉशिंगटन पोस्ट जैसी संस्थाएं भारत की नीतियों पर हमला करती हैं तो लोग पहले सबूत मांगते हैं और जब सबूत नहीं मिलते, तो अखबार पर ही उंगली उठाते हैं.

खिल्ली का पात्र बना वॉशिंगटन पोस्ट

आज वॉशिंगटन पोस्ट के लिए यह चुनौती का समय है. या तो वह निष्पक्षता की राह पर लौटे, या भारतीय पाठकों के लिए एक और अविश्वसनीय विदेशी आवाज़ बन जाए. क्योंकि, भारत में अगर किसी संस्था पर सबसे गहरा भरोसा है, तो वह है एलआईसी यानी भारतीय जीवन बीमा निगम. यह सिर्फ एक बीमा कंपनी नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के सपनों और सुरक्षा का प्रतीक है. इसी कारण जब वॉशिंगटन पोस्ट जैसी विदेशी मीडिया ने अडाणी समूह को मदद पहुंचाने का आरोप लगाया तो लोगों ने इस ख़बर पर हंसी में प्रतिक्रिया दी.

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वॉशिंगटन पोस्ट (Washington Post) के लिए चुनौती

वॉशिंगटन पोस्ट पर लगातार लग रहे तथ्यात्मक गलतियों के आरोपों ने उसकी विश्वसनीयता को लगभग समाप्त कर दिया है. लेकिन इस बार, भारतीयों ने सोशल मीडिया के माध्यम से खुद सच्चाई को सामने रखा. जब LIC ने अदाणी निवेश को कुल पोर्टफोलियो का 1% से भी कम और उस पर 120% से अधिक लाभ बताकर आरोपों को ध्वस्त किया तो यह सिद्ध हो गया कि वॉशिंगटन पोस्ट अब निष्पक्ष पत्रकारिता से ज़्यादा, राजनीतिक एजेंडे का मंच बन चुका है. आज, वॉशिंगटन पोस्ट के लिए यह एक अंतिम चुनौती है: या तो वह निष्पक्षता की राह पर लौटे, या भारतीय पाठकों के लिए एक और अविश्वसनीय, राजनीति से प्रेरित विदेशी आवाज बन जाए.



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