इंडिया ब्लॉक की बैठक में क्या-क्या हुआ?
INDIA Bloc Meeting Highlights: दिल्ली में बुधवार को विपक्षी दलों के ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन की अहम बैठक आयोजित हुई. बैठक में मुख्य रूप से चुनाव आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर विस्तृत चर्चा की गई. बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस और अपने सोशल मीडिया संदेश के जरिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला.
खड़गे ने साफ तौर पर कहा कि चुनाव आयोग स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर रहा है, बल्कि वह सरकार के इशारों पर चलने वाली संस्था बनकर रह गया है. इसके साथ ही INDIA गठबंधन ने 2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन, संसद मार्च और महारैलियों के पूरे रोडमैप का ऐलान कर दिया.
मल्लिकार्जुन खड़गे की 10 बड़ी बातें (Mallikarjun Kharge Big Point In INDIA Bloc Meeting)
- चुनाव आयोग पर कठपुतली: खड़गे ने कहा कि चुनाव आयोग के भीतर दो-तीन अधिकारी केवल मोहरे हैं, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह उन्हें कठपुतली की तरह चला रहे हैं.
- 13.3 करोड़ नाम काटे: उन्होंने आरोप लगाया कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के नाम पर देश के करीब 13.3 करोड़ वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से मनमाने ढंग से हटा दिए गए हैं, जिससे उनकी लोकतांत्रिक ताकत छीन ली गई है.
- CEC से इस्तीफे की मांग: खड़गे ने कहा कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पूरी तरह खत्म हो चुकी है. आयोग के अंदरूनी सदस्यों ने ही कई बार पत्राचार किया है. ऐसे में मुख्य चुनाव आयुक्त को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए.
- CJI को समिति से हटाने पर सवाल: उन्होंने 2023 के चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून का जिक्र करते हुए कहा कि जानबूझकर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को चयन पैनल से बाहर कर एक केंद्रीय मंत्री को शामिल किया गया, ताकि निष्पक्षता खत्म की जा सके.
- आयुक्तों को कानूनी सुरक्षा: खड़गे ने आरोप लगाया कि नए कानून के तहत चुनाव आयुक्तों को सिविल और क्रिमिनल मामलों से आजीवन कानूनी छूट देकर ‘रबर स्टैंप’ की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है.
- युवाओं को मताधिकार से रोका: उन्होंने कहा कि फॉर्म 6 के नियमों में बदलाव करके पहली बार वोट देने वाले युवाओं के रास्ते में जानबूझकर तकनीकी अड़चनें पैदा की जा रही हैं.
- EVM और वोटर लिस्ट में विसंगती: विपक्ष ने महादेवपुरा, आलंद, हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के उदाहरण देते हुए कहा कि सबूत देने के बावजूद चुनाव आयोग ने शिकायतों को नजरअंदाज किया.
- ‘एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य’ पर संकट: खड़गे ने संविधान के अनुच्छेद 324 का हवाला देते हुए कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष आयोग के बिना पारदर्शी चुनाव संभव नहीं हैं और संविधान की मूल भावना खतरे में है.
- विपक्ष की साझी लड़ाई: खड़गे ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए INDIA गठबंधन की सभी पार्टियां एकजुट होकर कानूनी और राजनीतिक लड़ाई लड़ेंगी.
- संस्थाओं के दुरुपयोग का मुद्दा: उन्होंने कहा कि विपक्ष अक्टूबर के दूसरे हफ्ते में राष्ट्रपति से समय मांगकर संवैधानिक संस्थाओं पर हो रहे कब्जे की पूरी जानकारी उनके सामने रखेगा.
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INDIA गठबंधन का एक्शन प्लान (INDIA Bloc Next Plan)
बैठक में विपक्ष ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन (INDIA Bloc Protest Schedule) की रूपरेखा तय की.
- 2 से 8 अक्टूबर: देश भर के सभी जिला मुख्यालयों (DM कार्यालयों) के बाहर INDIA ब्लॉक के घटक दल विशाल विरोध प्रदर्शन करेंगे.
- 6 अक्टूबर: INDIA गठबंधन के सभी सांसद संसद भवन से चुनाव आयोग के दफ्तर तक पैदल मार्च करेंगे.
- अक्टूबर के दूसरे हफ्ते में: विपक्षी दलों का एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलकर ज्ञापन सौंपेगा.
- अक्टूबर-नवंबर में 5 महारैलियां: देशभर के अलग-अलग राज्यों में पांच संयुक्त महारैलियां की जाएंगी, जिनकी तारीखें और स्थान जल्द तय होंगे.
- 1 नवंबर को दिल्ली में महाजुटान: राजधानी दिल्ली में विपक्ष की एक ऐतिहासिक महारैली आयोजित की जाएगी, जिसमें ‘वोट चोरी’ और लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन के खिलाफ बड़ा संदेश दिया जाएगा.
राहुल गांधी का बड़ा संदेश (Rahul Gandhi In INDIA Bloc)
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बैठक के बाद कहा कि देश का लोकतंत्र किसी भी पद या व्यक्ति से बड़ा है. उन्होंने जोर देकर कहा कि-
‘INDIA गठबंधन के सभी नेताओं का यह पक्का संकल्प है कि जिन लोगों ने भी भारतीय लोकतंत्र और चुनावी व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया है, उन्हें सजा जरूर दिलाई जाएगी.चाहे वे कितने भी बड़े पद पर क्यों न हों. देश के युवाओं में यह भावना घर कर चुकी है कि चुनाव में धांधली हो रही है और इस गलत व्यवस्था को रोकना बेहद जरूरी है.’
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने चुनाव आयोग को दी गई कानूनी छूट पर निशाना साधते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जजों तक को ऐसी कानूनी सुरक्षा हासिल नहीं है जैसी चुनाव आयुक्तों को दे दी गई है, जिससे यह साफ होता है कि व्यवस्था में दाल में कुछ काला है.
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