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UP Police के सिंघम हैं एनकाउंटर स्पेशलिस्ट DK Shahi, अर्धशतक लगाकर दो बार पा चुके हैं राष्ट्रपति से वीरता पुरस्कार

Deoria News: धर्मेश कुमार शाही, जो यूपी एसटीएफ में डिप्टी एसपी हैं, ने झारखंड के जमशेदपुर में एक एनकाउंटर में भाग लिया है. वह अब तक 50 से अधिक अपराधियों का एनकाउंटर कर चुके हैं.

STF Deputy SP DK Shahi

Deoria News: यूपी एसटीएफ में डिप्टी एसपी और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के नाम से चर्चित धर्मेश कुमार शाही उर्फ डीके शाही (DK Shahi) मुख्तार अंसारी के शार्प शूटर अनुज कन्नौजिया का झारखंड के जमशेदपुर में एनकाउंटर करने के बाद एक बार फिर से चर्चा में आ गए है. आपको बता दें कि यूपी पुलिस के सिंघम डीके शाही अब तक एनकाउंटर का अर्धशतक लगा चुके हैं. खास बात यह है कि उन्हें दो बार राष्ट्रपति से वीरता पुरस्कार भी मिल चुका है. डीके शाही का नाम सुनते ही माफिया व अपराधियों की नींद उड़ जाती है. आइए बताते हैं कौन हैं डीके शाही और उनके कौन से चर्चित कारनामे हैं.

अब तक कर चुके 50 एनकाउंटर

दरअसल, साल 2024 में सुल्तानपुर डकैती कांड को सुनकर आज भी माफिया व अपराधी शाही का नाम सुनकर थर-थर कांपने लगते हैं. शाही ने ही इस डकैती कांड के आरोपी मंगेश यादव को एनकाउंटर में मार गिराया है. मंगेश एक लाख का इनामी बदमाश था. उन्होंने अब तक करीब 50 बदमाशों, आतंकियों और डकैतों का मुठभेड़ के दौरान एनकाउंटर किया है.

कौन है डीके शाही?

देवरिया जिले के कारखाना विकास खंड क्षेत्र के नौतन निवासी धर्मेश कुमार शाही ने अपनी शिक्षा जिले से पूरी की. इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एमए और लखनऊ विवि से एलएलबी की पढ़ाई की. साल 2001 में उत्तर प्रदेश पुलिस में बतौर सब इंस्पेक्टर नियुक्त हुए. उनकी पहली तैनाती गोंडा में हुई. जब  लखनऊ में उनकी पोस्टिंग हुई, तो डीके शाही ने अपराधियों के खिलाफ मुहिम शुरू किया.

इसके बाद यूपी सरकार ने साल 2010 में डीके शाही को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन दिया, तो उनका उत्साह और बढ़ गया. उन्होंने कुशीनगर जंगल पार्टी के डकैत रूदल यादव को मुठभेड़ के दौरान उस समय मार गिराया, जब वह कहीं डकैती डालने जा रहा था. इंस्पेक्टर बनने के बाद डीके शाही ने अब तक करीब 50 बदमाशों, आतंकियों और डकैतों का मुठभेड़ के दौरान एनकाउंटर किया है. ऐसे ही डीके शाही के कारनामों की लिस्ट बढ़ती गई. तब उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें दूसरा प्रमोशन दिया और साल 2018 में वह सीओ बन गए.

सुल्तान के एनकाउंटर के बाद चर्चा में आए डीके शाही

डीके शाही पहली बार साल 2004 में दो सिपाहियों की हत्या कर फरार चल रहे 1 लाख के इनामी बदमाश देवेंद्र उर्फ सुल्तान को अमरोहा से गिरफ्तार कर पहली बार चर्चा में आए. साल 2005 में जौनपुर के बदमाश राकेश प्रधान और सुभाष ठाकुर के गुर्गे धीरज सिंह को हजरतगंज में मुठभेड़ में ठिकाने लगाया. वहीं साल 2006 में हरदोऔ के इनामी अपराधी चमन सिद्दीकी, ग्वालियर के बदमाश सोनू,मोनू चौहान को लखनऊ में.

साल 2007 में बिहार, यूपी, मध्य प्रदेश में आतंक का पर्याय बने पुष्पराज यादव को गोरखपुर में, दो सिपाहियों की हत्या करने के आरोपी संतोष पांडेय को रायबरेली में, साल 2008 में संतकबीर नगर में रामधनी शर्मा को, साल 2010 में मुंबई में आजमगढ़ के इनामी दिलीप यादव व बटलर राय को महराजगंज में तथा रिंकू सिंह और योगेंद्र को बारांबकी में पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया.

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सब इंस्पेक्टर के पद पर ज्वाइन किया UP पुलिस

डीके शाही की इस बेहतरीन काम को देखते हुए उन्हें एक नहीं बल्कि दो बार राष्ट्रपति से वीरता पुरस्कार पा चुके हैं और इस वजह से उन्हें दो बार प्रमोशन भी मिल चुका है. साल 2001 में उन्होंने सब इंस्पेक्टर के पद पर यूपी पुलिस ज्वाइन किया था और 2010 में उन्हें प्रमोशन देकर इंस्पेक्टर बना दिया गया था. इसके बाद साल 2019 में उन्हें डिप्टी एसपी के रैंक पर प्रमोट किया गया था और तब से वह इसी पद पर तैनात हैं. शाही ने अपनी नौकरी की शुरुआत गोंडा जिले से की थी और उसके बाद से वह नोएडा, लखनऊ और उन्नाव जैसी प्रमुख जगहों पर काम कर चुके हैं.

डीके शाही के एनकाउंटर पर कई बार उठे सवाल

डीके शाही के एनकाउंटर पर कई बार सवाल भी उठ चुके हैं. सुल्तानपुर डकैती कांड में डीके शाही द्वारा मंगेश यादव का एनकाउंटर करने पर जमकर चर्चा हुई थी. पूर्व सीएम एंव सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगेश यादव के एनकाउंटर पर सवाल उठाया था. डकैती कांड के आरोपी मंगेश पर 1 लाख का इनाम घोषित हुआ था.

-भारत एक्सप्रेस 



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