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BMC Election 2026: क्या खत्म होगी 30 साल की ठाकरे परिवार की विरासत! 1948 से शुरू हुआ सफर, अब किसकी होगी ताजपोशी?

BMC चुनाव 2026 से पहले मुंबई की राजनीति पूरी तरह गरमा गई है. 1948 से शुरू हुए बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनावों का लंबा इतिहास और ठाकरे परिवार की तीन दशक पुरानी सियासी विरासत इस बार सबसे बड़ी परीक्षा से गुजर रही है.

BMC Election 2026 in Mumbai

BMC Election 2026: महाराष्ट्र में चल रहे हैं बुहन्मुंबई महानपारलिका के चुनाव के चलते राजनीतिक सरगर्मी बढ़ती जा रही है. कभी ठाकरे बंधु मराठी अस्मिता की बात कर रहे हैं तो दूसरी तरफ बीजेपी (BJP) और शिवसेना (एकनाथ शिंदे) सियासी गठजोड़ में लगी हुई है. लेकिन इस सब के बीच यह जानना जरूरी है कि बीएमसी चुनाव का इतिहास कितना पुराना है और क्यों 30 साल से बुहन्मुंबई महानपारलिका (Mumbai municipal corporation) पर ठाकरे परिवार का वर्चस्व कायम है.

1948 से शुरू हुई कवायत (When was BMC first election held)

आजादी के बाद 1948 में पहली बार बीएमसी में वयस्क मताधिकार के आधार पर चुनाव कराए गए. इसके बाद 1950 में बॉम्बे अधिनियम संख्या 7 के तहत उपनगरों को नगर निगम में शामिल किया गया. उस समय नगर निगम में कुछ पदेन सदस्य भी होते थे, जैसे पुलिस आयुक्त, बॉम्बे पोर्ट ट्रस्ट (BPT) के अध्यक्ष, लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारी और अन्य सरकारी प्रतिनिधि.

1952 में ऐसे सभी विशेष और पदेन प्रतिनिधित्व समाप्त कर दिए गए, जिसके बाद नगर निगम पूरी तरह से निर्वाचित निकाय बन गया. इसके बाद 1957 में बॉम्बे अधिनियम संख्या 58 (1956) के अनुसार विस्तारित उपनगरों को भी नगर निगम में मिला दिया गया. आगे चलकर 1963 में नगर निगम चुनावों के लिए 140 सदस्य निर्वाचन क्षेत्रों की व्यवस्था शुरू की गई, जिससे चुनाव प्रक्रिया और अधिक व्यवस्थित और लोकतांत्रिक हो गई.

30 साल से BMC पर कर रहें राज (Shivsena ruling BMC for 30 years)

15 जनवरी को होने वाले बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) चुनाव शिवसेना (UBT) के लिए एक अग्निपरीक्षा साबित होंगे, क्योंकि जून 2022 के नाटकीय विभाजन के बाद यह उसका तीसरा चुनावी मुकाबला है. अविभाजित शिवसेना के रूप में लगातार 30 वर्षों तक शासन करने के बाद, उसने इस नगर निकाय पर अपना नियंत्रण खो दिया है और अब वह मुंबई के शक्तिशाली नगर निगम को फिर से पाप्त का प्रयास कर रही है, जहां अंतिम चुनाव फरवरी 2017 में हुए थे.

बीएमसी का चुनाव ठाकरे परिवार के लिए अपने आखिरी किले को बचाने की बहुत बड़ी चुनौती है. डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) ने उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और राज ठाकरे (Raj Thackeray) के हाल ही में शिवाजी पार्क में एक साथ आने को ‘सुविधा की संधि’ बताया. शिंदे का मानना है कि यह गठबंधन बीएमसी चुनाव हारने के डर से हुआ है. उन्होंने कहा कि यह दिलों का मिलन नहीं है, बल्कि उन लोगों का विलाप है जो अपना आखिरी किला हारने से डर रहे हैं.


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मुंबई में सियासी महासंग्राम (BMC Election 2026)

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में होने वाला इस बार का नगर निगम चुनाव बेहद अहम और रोमांचक बन गया है. बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव में करीब 1700 उम्मीदवार मैदान में उतरकर अपनी राजनीतिक किस्मत आजमा रहे हैं.

एक ओर सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन है, जिसमें बीजेपी, शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) और एनसीपी (अजित पवार गुट) शामिल हैं. वहीं दूसरी तरफ महाविकास अघाड़ी के दल, शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) और एनसीपी (शरद पवार गुट) चुनावी मोर्चे पर डटे हुए हैं.

इस चुनाव को खास इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि यह मुंबई में उद्धव ठाकरे और मनसे प्रमुख राज ठाकरे के संभावित गठबंधन की पहली बड़ी सियासी परीक्षा मानी जा रही है. ऐसे में यह मुकाबला सिर्फ नगर निगम तक सीमित नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है.

-भारत एक्सप्रेस



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