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क्या 2047 तक भारत बन पाएगा विकसित राष्ट्र? 100 करोड़ आबादी के पास नहीं है अतिरिक्त खर्च की क्षमता!

क्या भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बन पाएगा? ब्लूम वेंचर्स की रिपोर्ट के अनुसार, देश की 90% आबादी के पास अतिरिक्त खर्च करने की क्षमता नहीं है, जबकि सिर्फ 10% लोग अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ा रहे हैं.

India 2047 Developed Nation
Vijay Ram Edited by Vijay Ram

भारत 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. सरकार और नीति निर्माता इसे लेकर बड़े-बड़े लक्ष्य तय कर रहे हैं. लेकिन क्या हर भारतीय इस बदलाव को महसूस कर रहा है? क्या देश की आर्थिक वृद्धि वाकई जमीनी स्तर पर सभी को फायदा पहुंचा रही है?

इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को लेकर विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है. कुछ का मानना है कि अगर मौजूदा विकास दर को बनाए रखा जाए, तो भारत निश्चित रूप से 2047 तक विकसित देशों की सूची में शामिल हो सकता है. वहीं, कुछ अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यह लक्ष्य हासिल करना इतना आसान नहीं होगा क्योंकि स्थिर और व्यापक आर्थिक वृद्धि बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है.

लेकिन इस बीच, ब्लूम वेंचर्स की ‘इंडस वैली एनुअल रिपोर्ट 2025’ ने विकास की इस परिभाषा पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं. इस रिपोर्ट के अनुसार, देश की 90% आबादी यानी करीब 100 करोड़ भारतीयों के पास अपनी जरूरतों के अलावा कोई अतिरिक्त खर्च करने के लिए पैसा ही नहीं बचता. इसका मतलब यह है कि अधिकतर लोग केवल अपने मासिक खर्च पूरे करने में सक्षम हैं, लेकिन शौक, मनोरंजन, निवेश या लग्जरी जैसी चीजों पर खर्च करना उनके लिए संभव नहीं है.

यह रिपोर्ट इस बात की ओर भी इशारा करती है कि भारत में अमीर और अमीर हो रहे हैं, जबकि गरीब और मध्यम वर्ग अपने पुराने आर्थिक संघर्षों से ही जूझ रहे हैं. यह वही समस्या है, जो दशकों पहले थी और आज भी बनी हुई है. यदि इस असमानता को दूर नहीं किया गया, तो भारत का विकसित बनने का सपना अधूरा रह सकता है.

सिर्फ 10% लोगों के दम पर चल रही है अर्थव्यवस्था

ब्लूम वेंचर्स की ‘इंडस वैली एनुअल रिपोर्ट 2025’ के मुताबिक, भारत की 90% आबादी यानी करीब 100 करोड़ लोगों के पास अतिरिक्त खर्च करने के लिए पैसा ही नहीं है. ये लोग सिर्फ अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी कर पा रहे हैं, लेकिन किसी और चीज पर खर्च कर पाना उनके लिए मुश्किल है.

रिपोर्ट बताती है कि भारत में केवल 10% लोग ही देश की आर्थिक वृद्धि और उपभोग को आगे बढ़ा रहे हैं. यह समूह करीब 13-14 करोड़ लोगों का है, जो कि मेक्सिको की कुल आबादी के बराबर है. वहीं, लगभग 30 करोड़ लोग ऐसे हैं जो उपभोक्ता बनने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन खर्च करने में हिचकिचाते हैं.

बढ़ रही है महंगे प्रोडक्ट्स की मांग

भारतीय बाजार में अब कंपनियां सस्ते उत्पादों पर ध्यान देने के बजाय प्रीमियम प्रोडक्ट्स को बढ़ावा दे रही हैं. रिपोर्ट के अनुसार, देश के अफोर्डेबल रियल एस्टेट सेगमेंट में भी गिरावट आई है. पांच साल पहले यह 40% था, जो अब घटकर सिर्फ 18% रह गया है.

हाल ही में हुए कोल्डप्ले और एड शीरन के हाउसफुल कॉन्सर्ट्स को ‘एक्सपीरियंस इकोनॉमी’ के बढ़ते प्रभाव का उदाहरण बताया गया है. यानी जो लोग खर्च कर सकते हैं, वे महंगे अनुभवों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जबकि बाकी जनता सिर्फ जरूरतें पूरी करने में लगी हुई है.

हाल ही में पेश किए गए बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 12 लाख रुपये तक की आय पर इनकम टैक्स छूट देने की घोषणा की है. इससे देश के 92% सैलरीड लोगों को फायदा होगा और उनकी खर्च करने की क्षमता बढ़ सकती है.

अमीरों के पास बढ़ता जा रहा है देश की आय का हिस्सा

‘डेक्कन हेराल्ड’ के मुताबिक, 1990 में भारत के टॉप 10% लोगों के पास देश की कुल आय का 34% हिस्सा था, जो 2025 में बढ़कर 57.7% हो गया है. वहीं, निचले 50% लोगों की हिस्सेदारी 22.2% से घटकर 15% रह गई है.

हालांकि, भारत की खपत दर दुनिया की कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से बेहतर है, लेकिन रिपोर्ट बताती है कि देश अभी भी चीन से 13 साल पीछे है. 2023 में भारत की प्रति व्यक्ति खपत $1,493 थी, जबकि चीन में यह 2010 में ही $1,597 पर पहुंच गई थी.

-भारत एक्सप्रेस



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