5 जून यानी विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को एक बेहद अनोखे और सांस्कृतिक अंदाज में बधाई दी है. पीएम मोदी ने साफ कहा कि भारत के लिए प्रकृति की रक्षा करना सिर्फ कोई कानूनी फर्ज या औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह हमारी सदियों पुरानी संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली का एक अहम हिस्सा रहा है.
ऋग्वेद के मंत्र से समझाया पर्यावरण का महत्व
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जनता के नाम अपना संदेश साझा किया. उन्होंने अपने संदेश में ऋग्वेद के एक बेहद पवित्र और प्राचीन मंत्र का जिक्र किया:
प्रकृति का संरक्षण केवल एक दायित्व नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और संस्कारों का भी अभिन्न हिस्सा है।
मधु वाता ऋतायते मधु क्षरन्ति सिन्धवः।
माध्वीर्नः सन्त्वोषधीः॥ pic.twitter.com/dFqtF4hSWu
— Narendra Modi (@narendramodi) June 5, 2026
मधु वाता ऋतायत मधु क्षरन्ति सिन्धवः ।
माध्वीर नः सन्तु ओषधीः ।।
मंत्र का अर्थ समझाते हुए पीएम ने बताया कि हमारे आसपास बहने वाली हवाएं मधुर हों, हमारी नदियां हमेशा मीठा और स्वच्छ जल बहाती रहें, और इस धरती पर मौजूद तमाम ओषधियां यानी पेड़-पौधे और वनस्पतियां हमारे लिए जीवनदायी और मीठे फल दें.
63 सेकंड के वीडियो में दिखी भारत की प्राकृतिक खूबसूरती
अपने इस खास संदेश के साथ प्रधानमंत्री ने 63 सेकंड का एक छोटा सा वीडियो भी शेयर किया है. इस वीडियो में भारत के शांत और घने जंगलों, कल-कल बहती नदियों और खूबसूरत प्राकृतिक नजारों को दिखाया गया है. वीडियो के बैकग्राउंड में संस्कृत के इस मंत्र के साथ-साथ इसका हिंदी और अंग्रेजी अनुवाद भी दिया गया है, जो दुनिया भर को पर्यावरण बचाने और सभी जीव-जंतुओं के कल्याण का संदेश देता है.
प्रधानमंत्री ने देश के हर नागरिक से अपील की है कि वे प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर जिएं और पर्यावरण को बचाने के छोटे-छोटे प्रयासों को अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या में शामिल करें. उन्होंने जोर देकर कहा कि आज जागरूक होकर ही हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को एक साफ-सुथरा, प्रदूषण मुक्त और हरा-भरा भारत सौंप सकते हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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