US Israel Iran conflict: युद्धविराम लागू होने के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर से बढ़ गया है. सोमवार को अमेरिका सेना ने दक्षिणी ईरान में मिसाइल लॉन्च साइट्स और नौसेनिक जहाजों को निशाना बनाया. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का कहना है कि यह हमला आत्मरक्षा में किया गया क्योंकि ईरानी सेना से अमेरिकी सैनिकों को खतरा था.
ईरानी जहाजों पर भी हमला
CENTCOM प्रवक्ता टिमोथी हॉकिन्स ने बताया कि जिन ठिकानों पर हमला हुआ वहां से मिसाइल दागने की तैयारी थी. इसके अलावा ईरानी जहाज समुद्र में माइंस बिछाने की कोशिश कर रहे थे जिन्हें भी निशाना बनाया गया.
सीजफायर से पहले भी झड़पें
अमेरिका का दावा है कि वह युद्धविराम का सम्मान करता है लेकिन सैनिकों की सुरक्षा के लिए कार्रवाई जरूरी है. यह पहली बार नहीं है जब सीजफायर के दौरान झड़प हुई हो. मई की शुरुआत में भी अमेरिकी सेना ने ईरानी ठिकानों पर हमला किया था. उस समय अमेरिका ने आरोप लगाया था कि ईरानी सेना ने अमेरिकी युद्धपोत पर मिसाइल, ड्रोन और छोटी नौकाओं से हमला किया था. इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जवाबी कार्रवाई की अनुमति दी थी.
ट्रंप का यूरेनियम पर सख्त रुख
तनाव के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी अमेरिका का दबाव बढ़ रहा है. राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान के पास मौजूद हाईली एनरिच्ड यूरेनियम को या तो अमेरिका को सौंपना होगा या नष्ट करना होगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया ईरान में ही पूरी की जा सकती है या किसी सुरक्षित जगह पर ले जाकर की जा सकती है.
निगरानी की मांग
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल मीडिया पर लिखा कि इस प्रक्रिया की निगारानी एटॉमिक एनर्जी कमीशन या किसी समान संस्था की मौजूदगी में होगी. उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान को संवर्धित यूरेनियम रखने नहीं देगा.
ये भी पढ़ें-‘सुलह या महायुद्ध!’ ईरान पर डोनाल्ड ट्रंप की खुली चेतावनी, मुस्लिम देशों से की ये बड़ी अपील
आर्थिक दबाव की रणनीति
अमेरिकी अधिकारियों ने No dust, no dollars नया नारा दिया है. इसका मतलब है कि जब तक ईरान करीब 1000 पाउंड यानी लगभग 453 किलो संवर्धित यूरेनियम हटाता नहीं देता है तब तक उसे किसी भी तरह की आर्थिक राहत या समझौते का फायदा नहीं मिलेगा.
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.


