प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने डिजिटल और साइबर फ्रॉड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में Pay10 सर्विस प्राइवेट लिमिटेड, Asian Checkout Private Limited (ACPL) और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है. इस मामले में 13 से 15 मई 2026 के बीच कई ठिकानों पर छापेमारी की गई, जिसमें जांच एजेंसी के हाथ अहम सुराग लगे हैं.
करोड़ों की नकदी, आभूषण और लग्जरी गाड़ियां जब्त
ईडी की इस कार्रवाई में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े कई अहम दस्तावेज बरामद किए गए हैं. इसके साथ ही करीब 1.4 करोड़ रुपये नकद, लगभग 65 लाख रुपये के आभूषण और बुलियन, कई डिजिटल डिवाइस और चार लग्जरी वाहनों को भी जब्त किया गया है.
फर्जी वेबसाइट और पेमेंट गेटवे से काले धन का खेल
जांच में सामने आया है कि फर्जी वेबसाइटों और पेमेंट गेटवे के जरिए सैकड़ों करोड़ रुपये की अवैध रकम को सफेद किया जा रहा था. Pay10 और ACPL ने पेमेंट एग्रीगेटर और पेमेंट गेटवे के नाम पर फर्जी और संदिग्ध व्यापारियों को अपने प्लेटफॉर्म पर जोड़ा. इन वेबसाइटों पर सामान और सेवाओं की नकली बिक्री दिखाई जाती थी और फर्जी GST इनवॉइस तैयार किए जाते थे. इस तरह बेटिंग, गेमिंग और साइबर फ्रॉड से जुड़े लेनदेन को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया गया और अवैध धन की असली पहचान मिटाने की कोशिश की गई.
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दुबई का नागरिक निकला ‘मास्टरमाइंड’
ED ने इस फर्जी बिलिंग नेटवर्क में शामिल लोगों की पहचान कर ली है. जांच में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ है कि Pay10 का अंतिम लाभार्थी (UBO) दुबई में बैठा ग्रेनेडा का एक नागरिक है. इसके साथ ही इस पूरे खेल में कुछ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CAs) की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है. ईडी को अवैध ऑनलाइन बेटिंग, फर्जी इनवॉइस और हवाला नेटवर्क के जरिए नकद निपटान कर अपराध की कमाई को ठिकाने लगाने के पुख्ता सबूत मिले हैं.
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