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शिक्षक दिवस पर ILBS में विशेष व्याख्यान: नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक के. लाहिड़ी और प्रो. एस.के. सरीन ने साझा किया 2047 का हेल्थ विजन

ILBS TEACHER’S DAY ORATION: इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (ILBS) में शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में ‘विकसित भारत@2047 के लिए स्वास्थ्य सेवा की पुनर्कल्पना’ पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया. नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. अशोक के. लाहिड़ी और ILBS निदेशक प्रो. एस.के. सरीन ने प्रिवेंटिव हेल्थ और मेडिकल रिसर्च पर बल दिया.

सस्ती दवाएं, आयुष्मान भारत और प्रिवेंटिव केयर: ILBS में 'विकसित भारत 2047' के स्वास्थ्य मॉडल पर मंथन
Vijay Ram Edited by Vijay Ram

राजधानी दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित संस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (ILBS) में शिक्षक दिवस के अवसर पर एपीजे अब्दुल कलाम सभागार में एक विशेष व्याख्यान (Teacher’s Day Oration) का आयोजन किया गया. कार्यक्रम के मुख्य वक्ता नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. अशोक के. लाहिड़ी रहे.

इस समारोह का मुख्य विषय “Reimagining Healthcare for Viksit Bharat@2047” (विकसित भारत@2047 के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की पुनर्कल्पना) था. कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसमें संकाय सदस्य, शोधार्थी, विद्यार्थी और स्वास्थ्यकर्मी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे.

अस्पतालों से निकलकर समुदाय तक पहुंचे स्वास्थ्य सेवाएं: प्रो. एस.के. सरीन

ILBS के निदेशक प्रो. एस.के. सरीन ने अपने संबोधन में स्वास्थ्य सेवाओं को अस्पताल की चारदीवारी से बाहर निकालकर सीधे समुदाय तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने ILBS द्वारा जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में चलाए जा रहे अभियानों का उल्लेख किया, जिनमें स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य कार्यक्रम, ‘SMILES’ पहल और मध्य प्रदेश में संचालित आउटरीच गतिविधियां शामिल हैं. प्रो. सरीन ने कहा कि विशेषज्ञ संस्थानों का दायित्व केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि बीमारियों के गंभीर होने से पहले उनकी रोकथाम और प्रारंभिक जांच सुनिश्चित करना भी है.

‘जांच से आगे बढ़कर बीमारी की रोकथाम पर हो फोकस’: डॉ. अशोक के. लाहिड़ी

नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. अशोक के. लाहिड़ी ने अपने व्याख्यान में कहा कि 2047 तक स्वस्थ और कार्यकुशल कार्यबल तैयार करने के लिए भारत को एक सुलभ, सस्ती, नवाचारी और आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली विकसित करनी होगी.

उन्होंने प्रमुख चुनौतियों और प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए कहा:

प्रिवेंटिव हेल्थकेयर: देश की स्वास्थ्य नीति केवल बीमारियों की जांच और पहचान तक सीमित न रहे, बल्कि जीवनशैली में सुधार, बेहतर पोषण और जोखिम कारकों को नियंत्रित कर बीमारी को पनपने से पहले ही रोकना सबसे बड़ा लक्ष्य होना चाहिए.

गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियां: उन्होंने कुपोषण, संक्रामक बीमारियों, गैर-संचारी रोगों (NCDs) और रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR यानी एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस) को आने वाले समय की प्रमुख चुनौतियां बताया.

रिसर्च और नीति निर्माण: डॉ. लाहिड़ी ने कहा कि स्थानीय जरूरतों के अनुसार नवाचार और चिकित्सा अनुसंधान को बढ़ावा देकर सफल मॉडल को ठोस सार्वजनिक नीतियों में बदलना जरूरी है.

देश में मेडिकल शिक्षा का विस्तार और आयुष्मान भारत की भूमिका

व्याख्यान के दौरान देश में मेडिकल कॉलेजों, एमबीबीएस और पीजी सीटों में हुई व्यापक वृद्धि की सराहना की गई. वक्ताओं ने कहा कि भविष्य की स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कुशल चिकित्सा कार्यबल तैयार करना अनिवार्य है. साथ ही, दूरदराज के क्षेत्रों तक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने में आयुष्मान भारत योजना और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की क्षमता पर भी विस्तार से चर्चा हुई.

व्याख्यान के बाद हुए संवाद सत्र में विद्यार्थियों और फैकल्टी ने भारत की स्वास्थ्य प्राथमिकताओं पर अपने सवाल रखे. कार्यक्रम का मूल संदेश यह रहा कि ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने की नींव एक ‘स्वस्थ भारत’ के निर्माण पर ही टिकी है.



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