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नई दिल्ली, 29 जून 2026: भारतीय सर्राफा बाजार में पिछले कुछ महीनों से एक चौंकाने वाला नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है. आम तौर पर जब भी सोने की कीमतों में गिरावट आती है, तो भारतीय लोग खरीदारी के लिए उमड़ पड़ते हैं. लेकिन इस बार बाजार का रुख पूरी तरह से उलट है. सोने की कीमतों में और अधिक बड़ी गिरावट आने की आशंका (डीपर करेक्शन) के कारण भारतीय परिवारों में अपने लॉकरों में रखे पुराने सोने के गहनों को बेचने की होड़ मच गई है.
3 महीने में 43% बढ़ा सोना बेचने का आंकड़ा
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के अनुसार, इस साल अप्रैल से जून की तिमाही के दौरान भारतीय परिवारों ने रिकॉर्ड करीब 50 टन (50,000 किलोग्राम) पुराना सोना बेचा है. यह आंकड़ा पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 43 प्रतिशत अधिक है. मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि ग्राहक इस बार अपने पुराने आभूषणों के बदले नए आभूषण नहीं ले रहे, बल्कि वे सीधे गहने बेचकर मुनाफावसूली कर रहे हैं और नकद (कैश) अपने घर ले जा रहे हैं.
बाजार में क्यों है भारी गिरावट का डर?
इस समय मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना अपने ऑल-टाइम हाई स्तर से गिरकर करीब 1.43 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाजार में यह डर बना हुआ है कि वैश्विक दबाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका के चलते सोने की कीमतें आने वाले समय में गिरकर 1.2 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक आ सकती हैं. इसी भारी नुकसान से बचने के लिए लोग समय रहते अपने सोने को ऊंचे दामों पर भुना रहे हैं.

गोल्ड रीसाइक्लिंग उद्योग और देश को बड़ा फायदा
लोगों की इस प्रवृत्ति से देश के संगठित गोल्ड रीसाइक्लिंग उद्योग को जबरदस्त बूस्टर मिला है. लॉकरों में बेकार पड़ा सोना अब रिफाइन होकर मुख्य अर्थव्यवस्था में वापस आ रहा है. इस रीसाइक्लिंग की वजह से भारत की विदेशी सोने के आयात (इंपोर्ट) पर निर्भरता कम होगी. कयास लगाए जा रहे हैं कि इस साल देश में रिसाइकिल्ड गोल्ड की हिस्सेदारी बढ़कर 200 से 250 टन तक पहुंच सकती है, जिससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार को बड़ी राहत मिलेगी.
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