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‘मैं आत्महत्या कर लूंगा’, भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से जुड़ा एक दिलचस्प प्रसंग आया सामने, क्या है पूरा मामला?

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 2012 में चुनाव आयुक्त एस. वाई. कुरैशी से भावुक होकर कहा था कि मैं आत्महत्या कर लूंगा.

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से जुड़ा एक दिलचस्प प्रसंग सामने आया है. यह घटना 2012 की है जब उन्होंने तत्कालीन चुनाव आयुक्त एस. वाई. कुरैशी से बेहद भावुक अंदाज में कहा था कि मैं आत्महत्या कर लूंगा. इस बात का उल्लेख कुरैशी ने अपनी नई किताब India and I: A Hundred Memories, Not a Memoir में किया है जो जल्द ही प्रकाशित होने वाली है.

यूपी चुनाव और आरक्षण विवाद

जनवरी 2012 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान तत्कालीन कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने एक सभा में कहा था कि सत्ता में आने पर मुसलमानों के लिए नौकरियों में आरक्षण 4.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत कर दिया जाएगा. इस बयान पर बीजेपी ने चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी. बीजेपी का तर्क था कि आचार संहिता लागू होने के बाद नई योजनाओं की घोषणा नहीं की जा सकती.

आयोग की सुनवाई और फटकार

चार दिन तक चली सुनवाई में कांग्रेस की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी और बीजेपी की ओर से अरुण जेटली ने दलीलें दीं. अंततः चुनाव आयोग ने सलमान खुर्शीद को फटकार लगाई. इसके बाद कांग्रेस के कुछ नेताओं ने आयोग पर मनमानेपन का आरोप लगाया. कुरैशी लिखते हैं कि आलोचना उन्हें परेशान नहीं करती लेकिन संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना गंभीर था.

पीएम से मुलाकात का प्रसंग

इसी दौरान कुरैशी ने अपने ईद मिलन समारोह में प्रधानमंत्री के प्रेस सचिव हरीश खरे से अपनी नाराजगी साझा की. अगले दिन प्रधानमंत्री कार्यालय से फोन आया और मनमोहन सिंह ने खुद मिलने की इच्छा जताई. शाम सात बजे कुरैशी प्रधानमंत्री आवास पहुंचे.

भावुक हो उठे मनमोहन सिंह

कमरे में प्रवेश करते ही मनमोहन सिंह ने कहा कि हरीश ने मुझे बताया कि आपने क्या कहा. अगर आप ऐसा सोचते हैं तो मैं आत्महत्या कर लूंगा. यह सुनकर कुरैशी स्तब्ध रह गए. उनकी शिकायत मंत्रियों के व्यवहार को लेकर थी न कि प्रधानमंत्री से.

चुनाव आयोग को बताया लोकतंत्र की आत्मा

कुछ देर बाद स्थिति सामान्य हुई. मनमोहन सिंह ने कहा कि उन्हें इस विवाद की जानकारी नहीं थी वरना वे खुद कार्रवाई करते. उन्होंने कुरैशी से कहा कि भविष्य में सीधे उन्हें फोन करें. इसके बाद उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग सिर्फ भारत का गौरव नहीं है यह हमारे लोकतंत्र की आत्मा है. अगर हम इसे खो देंगे तो सब कुछ खो देंगे.

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कुरैशी की प्रतिक्रिया

कुरैशी लिखते हैं कि इस घटना ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया. उन्हें लगा कि मनमोहन सिंह सत्ता में रहते हुए भी संवैधानिक संस्थाओं के प्रति बेहद संवेदनशील थे. यह प्रसंग उनके लिए अविस्मरणीय बन गया.

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-भारत एक्सप्रेस



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