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दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ तक का सफर हुआ आसान; जानें कनेक्टिविटी, टिकट की कीमत और इसकी बेजोड़ खूबिया

दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ देखना अब और आसान हो गया है. भारतीय रेलवे की सीधी कनेक्टिविटी और सी-प्लेन ने सफर को और मजेदार बना दिया है.

Vijay Ram Edited by Vijay Ram

गुजरात के नर्मदा जिले में स्थित ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ (Statue of Unity) वर्तमान में दुनिया भर के पर्यटकों के लिए आकर्षण का एक बहुत बड़ा केंद्र बन चुकी है. लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को समर्पित यह प्रतिमा दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है. यदि आप भी इस अद्भुत और ऐतिहासिक स्मारक को देखने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है. भारतीय रेलवे ने देश के प्रमुख शहरों को सीधे केवड़िया (अब एकता नगर) रेलवे स्टेशन से जोड़ दिया है, जिससे यहां पहुंचने का सफर बेहद आसान, सस्ता और आरामदायक हो गया है.

देश का पहला ग्रीन बिल्डिंग स्टेशन बना केवड़िया

रेलवे बोर्ड ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए बुनियादी ढांचे में बड़ा बदलाव किया है. केवड़िया में बना नया रेलवे स्टेशन आधुनिक सुविधाओं से लैस एक विश्वस्तरीय रेलवे स्टेशन है. यह देश का पहला ‘ग्रीन बिल्डिंग’ सर्टिफाइड रेलवे स्टेशन है, जिसे पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों से तैयार किया गया है. वडोदरा के प्रतापनगर से केवड़िया के बीच रोजाना मेमू (MEMU) ट्रेनें चलाई जाती हैं. इसके अलावा, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी, रीवा और दिल्ली जैसे बड़े शहरों से भी केवड़िया के लिए सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं.

यह विशाल मूर्ति वडोदरा से लगभग 90 किलोमीटर और गुजरात के सबसे बड़े शहर अहमदाबाद से करीब 200 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. यदि आप सड़क मार्ग से आना चाहते हैं, तो अहमदाबाद या वडोदरा से राज्य राजमार्गों के जरिए आसानी से पहुंच सकते हैं. मुंबई से आने वाले सैलानी राष्ट्रीय राजमार्ग 48 (NH-48) और राज्य राजमार्ग 64 के जरिए लगभग 420 किलोमीटर की सुंदर सड़क यात्रा का आनंद ले सकते हैं. इसके अलावा, साबरमती रिवरफ्रंट (अहमदाबाद) से केवड़िया के बीच सी-प्लेन (Sea Plane) की अनूठी सेवा भी शुरू की गई है, जो पर्यटकों के सफर को और रोमांचक बना देती है.

कितना है टिकट का किराया और कैसे करें बुकिंग?

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और इसके आस-पास के पर्यटन स्थलों को देखने के लिए पर्यटकों को ऑनलाइन टिकट बुक करना होता है. इसके लिए सैलानी आधिकारिक वेबसाइट (https://www.soutickets.in/) पर जाकर पहले से अपनी सीट सुरक्षित कर सकते हैं. सोमवार के दिन यह पूरा परिसर पर्यटकों के लिए बंद रहता है, जबकि बाकी दिनों में इसके खुलने का समय सुबह 9:00 बजे और बंद होने का समय शाम 5:00 बजे निर्धारित है.

टिकट की कीमतों को दो अलग-अलग कैटेगरी में बांटा गया है, जिसकी जानकारी नीचे दी गई टेबल में देखी जा सकती है:

टिकट का प्रकार (Ticket Type) वयस्क (Adults) का शुल्क बच्चे (3 से 15 वर्ष) का शुल्क क्या-क्या देखने को मिलेगा (Inclusions)
बेसिक एंट्री टिकट ₹120 + ₹30 (बस शुल्क) ₹60 + ₹30 (बस शुल्क) प्रतिमा का बाहरी हिस्सा, फूलों की घाटी, सरदार सरोवर डैम और मेमोरियल.
व्यूइंग गैलरी टिकट ₹350 + ₹30 (बस शुल्क) ₹200 + ₹30 (बस शुल्क) बेसिक एंट्री की सभी चीजों के साथ मूर्ति के सीने के हिस्से में बनी मुख्य व्यूइंग गैलरी.

नोट: 3 वर्ष से कम उम्र के छोटे बच्चों के लिए एंट्री पूरी तरह से फ्री रखी गई है.

फूलों की घाटी और भव्य सरदार सरोवर बांध

एंट्री टिकट के साथ ही पर्यटकों को खूबसूरत ‘फूलों की घाटी’ (Valley of Flowers) घूमने का मौका मिलता है. सरदार पटेल की प्रतिमा से कुछ ही दूरी पर स्थित इस घाटी में 100 से भी अधिक प्रजातियों के रंग-बिरंगे फूल महकते हैं. इसके अलावा, यहां एक भव्य मेमोरियल, आधुनिक म्यूजियम (संग्रहालय) और ऑडियो-विजुअल गैलरी बनाई गई है, जहां सरदार पटेल के जीवन और भारत के एकीकरण की कहानी को दिखाया जाता है. पास में ही स्थित विशाल सरदार सरोवर बांध का नजारा भी पर्यटकों का दिल जीत लेता है.

हवा के थपेड़ों और भूकंप से भी सुरक्षित प्रतिमा

इंजीनियरिंग के लिहाज से स्टैच्यू ऑफ यूनिटी एक आधुनिक अजूबा है. इस प्रतिमा की कुल ऊंचाई 597 फीट (182 मीटर) है. इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह 6.5 तीव्रता के भयंकर भूकंप के झटकों को भी आसानी से झेल सकती है. इसके साथ ही यह 220 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाले चक्रवाती तूफानों और तेज हवाओं का भी डटकर सामना कर सकती है.

देशभर के किसानों द्वारा दिए लोहे से बनी मूर्ति

इस ऐतिहासिक प्रतिमा को बनाने में लगभग 2,989 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत आई थी. इसे रिकॉर्ड 33 महीनों के भीतर बनाकर तैयार किया गया, जो अपने आप में एक विश्व रिकॉर्ड है. तुलना के लिए बता दें कि चीन में स्प्रिंग टेम्पल बुद्ध की प्रतिमा को बनाने में 11 साल का लंबा समय लगा था. इस प्रतिमा के निर्माण में 85 प्रतिशत तांबे (कॉपर) का इस्तेमाल किया गया है, जिसकी वजह से सैकड़ों सालों तक इसमें जंग लगने का कोई खतरा नहीं है. इसके निर्माण में 2.10 लाख क्यूबिक मीटर कंक्रीट, 6,500 टन स्ट्रक्चरल स्टील और 18,500 टन सरियों का इस्तेमाल हुआ था. इस मूर्ति के लिए देशभर के लाखों किसानों ने खेती के पुराने औजारों और लोहे का दान दिया था.

व्यूइंग गैलरी से दिखता है विंध्य पर्वत का नजारा

प्रतिमा के भीतर दो बेहद आधुनिक और हाई-स्पीड लिफ्ट लगाई गई हैं. ये लिफ्ट पर्यटकों को महज कुछ ही सेकंड में जमीन से उठाकर सरदार पटेल की मूर्ति के सीने के हिस्से में बनी व्यूइंग गैलरी तक ले जाती हैं. इस बड़ी व्यूइंग गैलरी में एक साथ 200 लोग खड़े हो सकते हैं. यहां की बड़ी-बड़ी खिड़कियों से एक बार में 40 लोग एक साथ विशाल सरदार सरोवर बांध, नर्मदा नदी और दूर तक फैली विंध्य और सतपुड़ा पर्वत श्रृंखलाओं के विहंगम दृश्यों को निहार सकते हैं.

दुनिया का ‘आठवां अजूबा’ और CISF की सुरक्षा

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शंघाई सहयोग संगठन (SCO) ने इसे दुनिया के ‘आठवें अजूबे’ के रूप में मान्यता दी है. रोजाना यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या ने अमेरिका की मशहूर ‘स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी’ को भी पीछे छोड़ दिया है. इस राष्ट्रीय धरोहर की सुरक्षा को बेहद कड़ा रखा गया है. गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद अब इस पूरे परिसर की सुरक्षा केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के हवाले है. सीआईएसएफ के सैकड़ों जवान दिन-रात अत्याधुनिक हथियारों और सुरक्षा उपकरणों के साथ इस पूरे पर्यटन स्थल की सुरक्षा में मुस्तैद रहते हैं. यहां आने वाले पर्यटकों की सुविधा के लिए टेंट सिटी और वर्ल्ड क्लास होटलों की भी शानदार व्यवस्था की गई है.

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-भारत एक्सप्रेस



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