UP Assembly Elections: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं. इसी बीच कांग्रेस ने चुनावी मैदान में मजबूती से उतरने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की है. पार्टी न केवल अपनी संगठनात्मक स्थिति को मजबूत करने में लगी है, बल्कि संभावित गठबंधन की स्थिति में सीट बंटवारे की बातचीत के लिए भी खुद को तैयार कर रही है.
सूत्रों के मुताबिक, आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच गठबंधन की संभावना प्रबल मानी जा रही है. ऐसे में कांग्रेस चाहती है कि सीटों के तालमेल को लेकर होने वाली बातचीत में वह मजबूत स्थिति में रहे. इसी उद्देश्य से पार्टी ने उत्तर प्रदेश में एक विस्तृत सर्वे कराया है.
160 सीटों पर फोकस, तीन कैटेगरी में वर्गीकरण
कांग्रेस ने सर्वे के आधार पर करीब 160 विधानसभा सीटों को चिन्हित किया है. इन सीटों को तीन अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है.
- कैटेगरी-A में वे सीटें शामिल हैं जहां कांग्रेस को अपनी जीत की मजबूत संभावना दिखाई देती है. इन सीटों पर पार्टी अपने संगठन और उम्मीदवारों को लेकर विशेष तैयारी कर रही है.
- कैटेगरी-B में वे सीटें रखी गई हैं जहां समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन होने पर सामाजिक और राजनीतिक समीकरण कांग्रेस के पक्ष में जा सकते हैं. इन सीटों पर साझा रणनीति के जरिए बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जताई जा रही है.
- वहीं कैटेगरी-C में ऐसी सीटें शामिल हैं जहां पिछले चुनावों में कांग्रेस और सपा दोनों का प्रदर्शन कमजोर रहा है. इन सीटों पर जीत की संभावनाएं कम मानी जा रही हैं, लेकिन राजनीतिक समीकरण बदलने की स्थिति में इन्हें भी पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जाएगा.
- हर जिले में मौजूदगी चाहती है कांग्रेस
कांग्रेस की रणनीति सिर्फ सीट जीतने तक सीमित नहीं है. पार्टी पूरे प्रदेश में अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराना चाहती है. इसी सोच के तहत बड़े जिलों में कम से कम दो और छोटे जिलों में एक सीट पर चुनाव लड़ने की योजना बनाई गई है.
इसके अलावा कांग्रेस अमेठी, रायबरेली और उन क्षेत्रों में अधिक सीटों की दावेदारी पेश कर सकती है जहां उसके सांसद मौजूद हैं या जहां पार्टी का पारंपरिक प्रभाव रहा है. पार्टी का मानना है कि इन क्षेत्रों में उसका आधार अपेक्षाकृत मजबूत है और यहां उसे अधिक अवसर मिलने चाहिए.
लोकसभा चुनाव का अनुभव भी रहेगा अहम
लोकसभा चुनाव के दौरान सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस और सपा के बीच लंबी बातचीत हुई थी. उस समय कांग्रेस ने 37 सीटों की मांग की थी, लेकिन अंततः उसे 17 सीटें मिलीं. इनमें से कांग्रेस ने 6 सीटों पर जीत दर्ज की थी. इस प्रदर्शन ने पार्टी को आत्मविश्वास दिया है और अब वह विधानसभा चुनाव में अधिक सीटों की मांग कर सकती है.
सपा भी कर रही है पूरी तैयारी
दूसरी ओर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भी चुनावी तैयारियों में जुटे हुए हैं. वे लगातार संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने का काम कर रहे हैं. अखिलेश का मानना है कि प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को चुनौती देने की सबसे मजबूत स्थिति में समाजवादी पार्टी ही है.
हाल ही में उन्होंने कहा था कि पार्टी ने प्रदेश की सभी विधानसभा सीटों पर अपने संगठन को सक्रिय कर दिया है. साथ ही उन्होंने संभावित सहयोगी दलों को यह संदेश भी दिया कि सपा के मजबूत संगठन का लाभ गठबंधन के सभी दलों को मिलेगा.
अखिलेश यादव का नारा – ‘बात सीट की नहीं, जीत की है’ – स्पष्ट संकेत देता है कि सपा सीटों की संख्या से अधिक चुनावी सफलता को प्राथमिकता देना चाहती है.
दिलचस्प होगा सीट बंटवारे का गणित
आगामी विधानसभा चुनाव में विपक्षी एकता और सीटों का तालमेल सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक होगा. कांग्रेस अपने सर्वे, सामाजिक समीकरणों और जमीनी आंकड़ों के आधार पर अधिक सीटों की दावेदारी पेश करने की तैयारी में है, जबकि सपा अपने संगठनात्मक बल और पिछले चुनावी प्रदर्शन के आधार पर मजबूत स्थिति में दिखाई देती है.
ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे का फार्मूला क्या बनता है और क्या यह गठबंधन भाजपा के सामने एक प्रभावी चुनौती पेश कर पाता है. फिलहाल इतना तय है कि उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में रणनीति, समीकरण और गठबंधन की बिसात अभी से सजनी शुरू हो चुकी है.
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-भारत एक्सप्रेस
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