सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है, जिसमें कंपनी के लिक्विडेटर ने एनसीएलएटी के आदेश को चुनौती थी. सुप्रीम कोर्ट ने एनसीएलएटी के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया है. जिससे अडानी इंफ्रास्ट्रक्चर को केवल सीमित अवधि का ब्याज चुकाने की राहत बरकरार रहेगी.
एनसीएलएटी ने अडाणी इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलॉपर्स प्राइवेट लिमिटेड को 225 करोड़ रुपए के बकाया भुगतान में हुई देरी पर 12 प्रतिशत ब्याज देने का निर्देश दिया था. लेकिन देरी की पूरी अवधि पर ब्याज लगाने से छूट दे दी थी. जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने यह आदेश दिया है. अदालत ने लिक्विडेटर की अपील खारिज करते हुए कहा कि दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के मामलों में तय समय सीमा का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए. कोर्ट ने संकेत दिया गया देरी को उदारतापूर्वक माफ करने का रवैया आईबीसी के उद्देश्य को कमजोर कर सकता है.
एनसीएलटी अहमदाबाद ने देरी पर ब्याज माफ किया
बता दें कि दिसंबर 2022 में अडानी इंफ्रास्ट्रक्चर ने नीलामी के जरिए 325 करोड़ रुपए में एक जमीन खरीदी थी. कंपनी ने शुरुआती तौर पर 70 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया, लेकिन बाकी 225 करोड़ रुपए जमा करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा. कंपनी का कहना था कि जमीन पर राज्य कर विभाग की अटैचमेंट और कुछ स्वामित्व संबंधी मुद्दे सामने आए थे. जबकि लिक्विडेटर का तर्क था कि नीलामी जैसे है, जहां है के आधार पर हुई थी, इसलिए इन कारणों से भुगतान में देरी उचित नहीं ठहराई जा सकती. जून 2024 में एनसीएलटी अहमदाबाद ने देरी पर ब्याज माफ कर दिया था. इसके खिलाफ लिक्विडेटर ने लगभग 46.81 करोड़ रुपए की वसूली की मांग करते हुए अपील की थी. एनसीएलएटी ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि लिक्विडेशन नियमों के तहत भुगतान की समय-सीमा अनिवार्य है. इसलिए अडानी इंफ्रास्ट्रक्चर को बकाया राशि पर 12 प्रतिशत ब्याज देना होगा.
हालांकि जिस अवधि के लिए एनसीएलटी ने भुगतान की समय-सीमा बढ़ाई थी, उस दौरान का ब्याज माफ कर दिया गया. इसके अनुसार कंपनी को 29 जनवरी 2023 से 15 जून 2023 तक की अवधि के लिए 12 प्रतिशत ब्याज अदा करना होगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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