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झारखंड DGP अनुराग गुप्ता नियुक्ति मामला: सुप्रीम कोर्ट 8 अक्टूबर को करेगा सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट झारखंड के DGP अनुराग गुप्ता की नियुक्ति को चुनौती देने वाली केंद्र सरकार की याचिका पर 8 अक्टूबर को सुनवाई करेगा. प्रकाश सिंह मामले के उल्लंघन का आरोप है.

DGP Anurag Gupta Jharkhand

झारखंड के पुलिस महानिदेशक (DGP) अनुराग गुप्ता की नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार द्वारा दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट आगामी 8 अक्टूबर को सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है. केंद्र सरकार ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि राज्य सरकार ने डीजीपी की नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान ‘प्रकाश सिंह मामले’ में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों की पूरी तरह से अनदेखी और उल्लंघन किया है.

सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी का अभाव

केंद्र की ओर से दायर अर्जी में कहा गया है कि झारखंड सरकार ने डीजीपी का चयन और नियुक्ति करते समय ‘प्रकाश सिंह जजमेंट’ के नियमों का पालन नहीं किया. राज्य सरकार ने इस नियुक्ति को नोटिफाई करने से पहले सुप्रीम कोर्ट से कोई मंजूरी नहीं ली थी.

सेवाकाल और नियमों में बदलाव

अनुराग गुप्ता को 2 फरवरी 2025 को दो साल के लिए डीजीपी के पद पर नियुक्त किया गया था, जबकि उस समय उनकी सेवा का कार्यकाल केवल तीन महीने ही बचा था और उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख 30 अप्रैल 2025 थी. इसके बाद, राज्य सरकार ने 29 दिसंबर 2025 के एक प्रस्ताव के जरिए छह महीने की बची हुई सेवा की शर्त को हटा दिया.

एमएचए (MHA) का निर्देश

केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने 6 जनवरी 2026 को राज्य सरकार से इस नियम और नियुक्ति को रद्द करने के लिए कहा था, क्योंकि उस समय तदाशा मिश्रा को भी डीजीपी नियुक्त किया गया था जो 31 दिसंबर 2025 को रिटायर होने वाली थीं. केंद्र का आरोप है कि राज्य ने अपनी पसंद के अनुसार चयन प्रक्रिया से हटकर डीजीपी को दो साल का कार्यकाल देने के लिए ‘प्रकाश सिंह मामले’ के निर्देशों का चुनिंदा (Selective) इस्तेमाल किया.

बाबू लाल मरांडी की याचिका

इस मामले से जुड़ी अन्य याचिकाएं भी अदालत के समक्ष लंबित हैं. भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी द्वारा दायर याचिका में पहले ही यह सवाल उठाया जा चुका है कि राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नए नियमों के तहत संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की भूमिका को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है.

प्रकाश सिंह मामला और यूपीएससी पैनल

सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक 22 सितंबर 2006 के आदेश में निर्देश दिया था कि राज्य सरकार डीजीपी के पद के लिए पात्र अधिकारियों की सूची यूपीएससी को भेजेगी. आयोग द्वारा तैयार पैनल से ही सरकार किसी अधिकारी को डीजीपी के पद पर नियुक्त करेगी. डीजीपी का कार्यकाल नियुक्ति की तिथि से न्यूनतम दो वर्ष का होगा, चाहे उनकी सेवानिवृत्ति की तिथि पहले क्यों न हो. यह नियुक्ति पूरी तरह से मेरिट के आधार पर होनी चाहिए, जिस पर किसी प्रकार का राजनीतिक दबाव या प्रभाव नहीं होना चाहिए.

झारखंड सरकार की नई नियमावली

झारखंड सरकार ने डीजीपी की नियुक्ति के लिए एक नई नियमावली बनाई है, जिसके तहत एक ‘नॉमिनेशन कमेटी’ का गठन किया गया है. इसी समिति ने अनुराग गुप्ता के नाम पर मुहर लगाई थी, जिसके बाद उन्हें स्थाई डीजीपी बनाया गया था. याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि अनुराग गुप्ता के मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के विपरीत यूपीएससी को नाम का पैनल भेजे बिना ही स्थाई डीजीपी नियुक्त कर दिया गया.

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पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि “सरकारें खुद कानून अपने हाथ में ले रही हैं.” अब 8 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में इस पूरे मामले पर अदालत का रुख बेहद अहम रहने वाला है.



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