गैंगस्टर अधिनियम के आरोप में चित्रकूट जेल में बंद मऊ से विधायक अब्बास अंसारी को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत मिल गई है. जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने अब्बास अंसारी को अंतरिम जमानत दे दी है. साथ ही कोर्ट ने यूपी पुलिस से 6 सप्ताह में जवाब मांगा है. कोर्ट उसके बाद तय करेगा कि अब्बास अंसारी को मिली अंतरिम जमानत की अवधि को बढ़ाया जाए या नहीं.
कोर्ट ने कहा कि मऊ जाने से पहले अब्बास अंसारी को जिला अधिकारी और ट्रायल कोर्ट को सूचित करना होगा. साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें निर्देश दिया है कि अंतरिम जमानत पर बाहर आने के बाद वे कोई बयान नहीं देंगे. बाकी की शर्तें निचली अदालत तय करेगी.
अब्बास अंसारी का पक्ष
मामले की सुनवाई के दौरान अब्बास अंसारी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि उनके मुवक्किल को किसी न किसी कारण से जेल में डाला जा रहा है. गवाह पुलिसवाले हैं. उन्होंने यह भी कहा कि एक के बाद एक समान एफआईआर दर्ज कराई जा रही हैं, लेकिन कोई भी सामने नहीं आया कि उससे उगाही की गई हो.
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कहा कि कृपया उनके आचरण पर गौर करें. वे किसी भी गवाह को प्रभावित कर सकते हैं और धमका सकते हैं. कुछ प्रमुख गवाहों से अभी भी पूछताछ होनी बाकी है. उन्होंने कहा कि प्रक्रियागत आधार पर जमानत दी गई है, लेकिन वे समाज के लिए खतरा हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आखिर कितने दिन तक उन्हें जेल में रखा जाएगा? ट्रायल तो चलाना होगा. कोर्ट ने यह भी कहा कि अब्बास अंसारी 4 नवंबर 2022 से जेल में हैं. कोर्ट ने उन्हें लखनऊ स्थित आधिकारिक घर में रहने का आदेश दिया है.
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इससे पहले, कपिल सिब्बल ने कहा था कि जांच पूरी हो चुकी है और उत्तर प्रदेश गैंगस्टर अधिनियम के तहत दर्ज मामले में आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है. उन्होंने यूपी पुलिस पर गलत हलफनामा दाखिल करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि उनके मुवक्किल अंसारी के खिलाफ कोई मामला लंबित नहीं है. इस पर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कहा था कि इस मुद्दे पर उन्हें सक्षम अधिकारी से और स्पष्टीकरण लेने की आवश्यकता है.
-भारत एक्सप्रेस
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