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अडानी ग्रुप पर ‘झूठ’ फैलाने की सजा, पत्रकार रवि नायर को 1 साल की जेल और जुर्माना

Adani Group Defamation Case Verdict: गांधीनगर की कोर्ट ने पत्रकार रवि नायर को अडानी इंटरप्राइजेज मानहानि मामले में दोषी करार दिया है. उन्हें 1 साल की जेल और जुर्माने की सजा सुनाई है.

Adani Group Defamation Case Verdict Ravi Nair Convicted

Adani Group Defamation Case Verdict: सोशल मीडिया पर बिना तथ्यों के आरोप लगाना और किसी की प्रतिष्ठा को धूमिल करना कितना भारी पड़ सकता है, इसका ताजा उदाहरण गांधीनगर की एक अदालत में देखने को मिला. अडानी इंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) द्वारा दायर आपराधिक मानहानि मामले में मंगलवार को मानसा मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पत्रकार रवि नायर को दोषी करार दिया है. कोर्ट ने उन्हें एक साल के कारावास की सजा सुनाई है और उन पर जुर्माना भी लगाया है.

ट्वीट्स पर क्यों हुआ बवाल? (Adani Group Vs Ravi Nair)

यह मामला अडानी समूह की प्रमुख कंपनी AEL की शिकायत पर आधारित था. कंपनी ने आरोप लगाया था कि रवि नायर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कई ऐसे पोस्ट किए, जिनमें झूठे और मानहानिकारक बयान थे. AEL का तर्क था कि इन ट्वीट्स का उद्देश्य कंपनी और अडानी समूह की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना और निवेशकों की नजर में उसकी विश्वसनीयता को कम करना था.

बचाव पक्ष की दलील खारिज

कोर्ट ने पाया कि नायर के ट्वीट ‘निष्पक्ष टिप्पणी’ या ‘वैध आलोचना’ की श्रेणी में नहीं आते, बल्कि वे जानबूझकर इमेज खराब करने के लिए किए गए थे. विस्तृत सुनवाई के बाद अदालत ने माना कि AEL ने अपना केस सफलतापूर्वक साबित कर दिया है.

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इस फैसले पर कानून के जानकारों का कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता असीमित नहीं है. इस पर मानहानि एक मान्य प्रतिबंध है. वहीं, अनुच्छेद 21 के तहत ‘प्रतिष्ठा का अधिकार’ (Right to Reputation) एक मौलिक अधिकार है.

मीडिया ट्रायल पर टिप्पणी

विशेषज्ञों ने कहा कि बिना पुष्टि के बार-बार आरोप लगाना ‘मीडिया ट्रायल’ जैसा है, जो कानूनन गलत है. सुप्रीम कोर्ट भी हिंडनबर्ग मामले में शॉर्ट सेलिंग और झूठे दावों से होने वाले नुकसान पर चिंता जता चुका है. रवि नायर को आपराधिक मानहानि का दोषी पाया गया. फिलहाल नायर की ओर से इस फैसले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.



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