इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के आगामी चुनाव को लेकर जारी की गई अनंतिम मतदाता सूची पर अधिवक्ताओं में गहरा असंतोष देखने को मिला है. 22 जून (रविवार) तक आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तिथि थी, और इस दौरान लगभग तीन हजार अधिवक्ताओं ने अपनी आपत्तियां दाखिल कीं. इससे यह स्पष्ट होता है कि सूची में बड़ी संख्या में विसंगतियां पाई गई हैं.
मानकों के बावजूद नाम नहीं, अधिवक्ताओं में नाराजगी
कई ऐसे अधिवक्ता जिनका दावा है कि उन्होंने तय सभी मानकों को पूरा किया है, उनका नाम सूची में शामिल नहीं किया गया, जिससे वे आक्रोशित हो गए. इसको लेकर नारेबाजी भी हुई और बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने आपत्ति दर्ज कराई. अधिवक्ताओं का कहना है कि इस प्रकार की अनदेखी से निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न लगता है.
‘वन बार, वन वोट’ की मांग
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व कार्यकारिणी सदस्य कृष्ण मनोहर तिवारी ने ‘वन बार, वन वोट’ नियम का सख्ती से पालन करने की मांग की है. उनका कहना है कि कई अधिवक्ता ऐसे हैं जो अन्य बार एसोसिएशनों के भी सदस्य हैं और वहां मतदान भी कर चुके हैं. उन्होंने ऐसे अधिवक्ताओं को मतदाता सूची से बाहर करने की अपील की है.
चुनाव अधिकारी का आश्वासन
मुख्य चुनाव अधिकारी वरिष्ठ अधिवक्ता आरके ओझा ने कहा है कि सभी आपत्तियों की गहन जांच की जाएगी और पात्र अधिवक्ताओं को अंतिम सूची में शामिल किया जाएगा. उन्होंने ‘वन बार, वन वोट’ नियम के पालन का आश्वासन देते हुए कहा कि उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई होगी.
निष्पक्षता के लिए कड़े कदमों की मांग
अधिवक्ताओं संतोष कुमार त्रिपाठी, अमित दूबे, संतोष मिश्रा, अखिलेश शर्मा, सीपी उपाध्याय, वीर सिंह, योगेन्द्र पांडेय आदि ने चुनाव समिति से निष्पक्ष व पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने हेतु कड़े कदम उठाने की मांग की है.
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