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इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश — रिश्वत मामले में गिरफ्तार किए गए पुलिस अधिकारी वर्दी में हाजिर हों

Allahabad High Court news: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साधारण कपड़ों में पेश पुलिस अधिकारी की निंदा की, डीजीपी को वर्दी में अदालत आने के दिशानिर्देश जारी करने का आदेश दिया.

allahabad high Court
Vijay Ram Edited by Vijay Ram

प्रयागराज के इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक पुलिस अधिकारी के साधारण कपड़ों में अदालत में पेश होने पर कड़ा रुख अपनाया. न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह की एकल पीठ ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को निर्देश दिया कि वे सभी पुलिस अधिकारियों के लिए दिशानिर्देश जारी करें, ताकि वे आधिकारिक क्षमता में अदालत में उपस्थित होने पर अपने पद के लिए निर्धारित वर्दी पहनें. यह आदेश एक जमानत अर्जी की सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत दर्ज मामले में जमानत की मांग की गई थी.

रंगे हाथों पकड़ा गया था जांच अधिकारी

यह मामला मिर्जापुर के भ्रष्टाचार निरोधक संगठन से जुड़ा है. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि एक जांच अधिकारी ने भारतीय दंड संहिता की धारा 303(2), 317(2), खान एवं खनिज अधिनियम की धारा 4/21, और लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम की धारा 3 के तहत दर्ज एक मामले में आरोपी का नाम उजागर न करने के लिए 15,000 रुपये की रिश्वत मांगी. बाद में यह राशि 5,000 रुपये में तय हुई. ट्रैप टीम ने शिकायतकर्ता द्वारा रिश्वत के 5,000 रुपये देने के तुरंत बाद जांच अधिकारी को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया.

जांच अधिकारी का अनुचित आचरण

सुनवाई के दौरान भ्रष्टाचार निरोधक संगठन, मिर्जापुर के निरीक्षक कृष्ण मोहन राय, जो इस मामले के जांच अधिकारी थे, रंगीन शर्ट और पैंट पहनकर अदालत में पेश हुए. कोर्ट ने इसे अनुचित माना और कहा कि पुलिस अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे अदालत में निर्धारित वर्दी में उपस्थित हों. साधारण कपड़े पहनकर आना न केवल अदालत की मर्यादा का उल्लंघन है, बल्कि न्यायिक कार्यवाही को भी कमजोर करता है.

कोर्ट की टिप्पणी और चेतावनी

राज्य की ओर से पेश अतिरिक्त सरकारी वकील (एजीए) ने बताया कि जब उन्होंने राय को वर्दी न पहनने के लिए टोका, तो वे नाराज हो गए और उनका व्यवहार अनुचित था. हाईकोर्ट ने राय के इस आचरण की कड़ी निंदा की और उन्हें भविष्य में सावधान रहने की चेतावनी दी. कोर्ट ने यह भी पाया कि राय ने मामले की निष्पक्ष जांच नहीं की और यह सत्यापित करने का प्रयास नहीं किया कि आवेदक ने मामले में कोई जांच की थी या नहीं.

जमानत अर्जी मंजूर

मामले के तथ्यों, परिस्थितियों, और पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद कोर्ट ने जमानत अर्जी को मंजूर कर लिया. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मुकदमे की स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया. साथ ही, डीजीपी को सभी पुलिस अधिकारियों के लिए वर्दी संबंधी दिशानिर्देश लागू करने का निर्देश दिया गया, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों.



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