इलाहाबाद हाई कोर्ट
विशाल तलवार
प्रयागराज (25 सितंबर 2026): उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेसवे पर चलती स्लीपर बस में भीषण आग लगने से 9 यात्रियों की दर्दनाक मौत के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognizance) लिया है. न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने 25 सितंबर को विभिन्न समाचार पत्रों और मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए इस घटना को अत्यंत गंभीर माना और इसे जनहित याचिका (PIL) के रूप में दर्ज कर राज्य सरकार से कड़ा जवाब मांगा है.
अदालत में पेश हुए मुख्य सचिव और डीजीपी
अदालत के संज्ञान लेने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP) और अपर मुख्य सचिव (परिवहन) वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से व्यक्तिगत रूप से पीठ के समक्ष उपस्थित हुए. अधिकारियों ने हादसे के कारणों और अब तक की गई प्रशासनिक व पुलिस कार्रवाई की विस्तृत जानकारी दी. मुख्य सचिव ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि चूंकि स्लीपर बसें मुख्य रूप से रात के समय चलती हैं, इसलिए रात में विशेष जांच अभियान चलाया जाएगा और बसों के केवल निर्धारित व सुरक्षित हॉल्ट्स पर रुकने की कड़ी निगरानी की जाएगी.
कोर्ट ने याद दिलाईं पूर्व की भयावह घटनाएं
अदालत ने सुनवाई के दौरान चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के हाईवे और एक्सप्रेसवे पर ऐसी दर्दनाक घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं:
जुलाई 2023: रायबरेली-प्रयागराज-लखनऊ हाईवे पर बस में आग से 3 यात्रियों की मौत.
नवंबर 2024: कन्नौज के पास लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर 4 मौतें.
दिसंबर 2025: यमुना एक्सप्रेसवे (मथुरा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र) पर भीषण बस हादसे में 13 मौतें.
कोर्ट ने संसद के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए बताया कि केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री द्वारा राज्यसभा में पेश रिकॉर्ड के मुताबिक, जनवरी 2023 से 10 दिसंबर 2025 के बीच देशभर में परिवहन वाहनों में लगभग 45 अग्निकांड हुए, जिनमें 64 निर्दोष यात्रियों की जान गई और 145 लोग गंभीर रूप से झुलसे.
AIS मानकों का उल्लंघन मिला तो लाइसेंस रद्द करने पर हो विचार
सुनवाई के दौरान कोर्ट के न्यायमित्र और शोध सहयोगियों ने पीठ को बताया कि यात्री बसों के संचालन के लिए ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स (AIS) अनिवार्य हैं:
- AIS-052: बॉडी डिज़ाइन और निर्माण मानक
- AIS-119: स्लीपर कोच के लिए निर्धारित सुरक्षा मानक
- AIS-135: आधुनिक अग्नि सुरक्षा और रोकथाम प्रणाली
इन मानकों में आपातकालीन निकास द्वार (इमरजेंसी एग्जिट), निर्धारित चौड़ाई वाले गैंगवे, ऑटोमैटिक फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम (FDSS) और ड्राइवर सतर्कता प्रणाली अनिवार्य रूप से शामिल हैं. न्यायमूर्ति शमशेरी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यदि जांच में पाया जाता है कि दुर्घटनाग्रस्त बस ने इन मानकों का उल्लंघन किया था, तो चालक और परिचालक के साथ-साथ बस मालिक/लाइसेंसधारी के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए, और आवश्यकता पड़ने पर ऑपरेटर का परमिट व लाइसेंस रद्द करने पर भी विचार किया जाए.
अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह अगली सुनवाई तक विस्तृत हलफनामा दाखिल करे. इसमें पिछले तीन वर्षों के दौरान जारी किए गए बस परमिट, फिटनेस जांच की प्रक्रिया, राज्य की सीमा चौकियों पर सुरक्षा व्यवस्था और लापरवाह ऑपरेटरों के खिलाफ की गई आपराधिक कार्रवाई का पूरा ब्योरा पेश करने को कहा गया है. मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को होगी.
आखिर क्यों हादसों का हाईवे माना जाता है यमुना एक्सप्रसवे?
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

