द्वारका कोर्ट के पूर्व अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमन प्रताप सिंह ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने दायर याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है.
दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रोबेशन पर तैनात एडीजे अमन प्रताप सिंह की सेवा को चुनौती देने वाली याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि अक्टूबर 2024 में कई गई उनकी बर्खास्तगी सामान्य कार्रवाई थी. जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की खंडपीठ ने फैसला देते हुए कहा था कि प्रोबेशन अवधि के दौरान जज की सेवा समाप्ति उच्चतर न्यायिक सेवा नियम 1970 के नियम 14 के तहत वैध है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि परिवीक्षा पर नियुक्त न्यायाधीश को स्थायी नियुक्ति का कोई निहित अधिकार नहीं होता है.
9 सितंबर 2024 का वीडियो विवाद का मुख्य कारण बना
अमन प्रताप सिंह को अप्रैल 2023 में दिल्ली उच्चतर न्यायिक सेवा (डीएचजेएस) में दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि पर नियुक्त किया गया था. नौकरी से निकाले जाने वाले फैसले को सही ठहराते हुए हाई कोर्ट ने कहा था कि यह फैसला याचिकाकर्ता के परफॉर्मेंस, व्यवहार और सर्विस रिकॉर्ड के पूरे असेसमेंट पर आधारित है, जिसमें खराब एसीआर (वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट)और फूल कोर्ट के सामने रखी गई शिकायते शामिल है. बात है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने द्वारका कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमन प्रताप सिंह का वीडियो वायरल होने के बाद सेवा समाप्त करने की सिफारिश की थी. जिसके बाद विधि, न्याय एवं विधायी कार्य विभाग ने जस्टिस अमन प्रताप सिंह की सेवा को समाप्त करने के लिए अधिसूचना जारी कर दिया.
दरअसल 9 सितंबर 2024 को एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें याचिकाकर्ता एक वादी के साथ कथित तौर पर अमर्यादित तरीके से बोलते हुए और असभ्य व्यवहार करते हुए दिखाई दिए.
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-भारत एक्सप्रेस
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