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अब आम लोगों तक भी आसानी से पहुंचेगी महत्वपूर्ण कानूनी जानकारी- पूर्व CJI गवई

डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर हैदराबाद स्थित NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ में आयोजित “डॉ. भीमराव अंबेडकर मेमोरियल लेक्चर 2026” में पूर्व सीजेआई बी. आर. गवई ने डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका पर जोर दिया.

CJI BR Gavai Retirement Plan Supreme Court Farewell Function

संविधान और सामाजिक न्याय के इतिहास में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के योगदान को भुलाया नही जा सकता. यह प्रेरणादायक है. डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने न केवल संविधान निर्माण की प्रक्रिया का नेतृत्व किया बल्कि समाज में समानता, शिक्षा और अधिकारों की नई चेतना भी जगाई है. यही कारण है कि देश हर साल 14 अप्रैल को उनकी जयंती मनाता है.

इस अवसर पर हैदराबाद स्थित NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ में आयोजित डॉक्टर भीमराव अंबेडकर मेमोरियल लेक्चर 2026 के दौरान कार्यक्रम में शामिल पूर्व सीजेआई बीआर गवाई ने डिजिटल पर विशेष जोड़ दिया. उन्होंने कहा कि यहां पर एक डिजिटल आर्काइव और ऑनलाइन रिसर्च प्लेटफार्म विकसित किया जाएगा. जिसका फायदा न केवल शोधकर्ताओं और छात्रों को होगा, बल्कि आम लोगों तक भी महत्वपूर्ण कानूनी जानकारी आसानी से पहुंच जाएगी.

विकास और समानता का गहरा संबंध

पूर्व सीजेआई गवई ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए नीतिगत शोध, वर्किंग पेपर्स और कानूनी विश्लेषण को सरकार, न्यायपालिका और सिविल सोसायटी तक तेजी से पहुचाया जा सकेगा. इसके अलावे ऑनलाइन जर्नल और वर्चुअल वर्कशॉप के माध्यम से वैश्विक स्तर पर संवाद को भी बढ़ावा मिलेगा. गवई ने.साफ कहा कि सिर्फ आर्थिक विकास ही पर्याय नही है. अगर विकास में समानता शामिल नही होगी, तो वह टिकाऊ नही हो सकता.

उन्होंने सवाल उठाया कि विकास किसके लिए और किस कीमत पर? उन्होंने बताया कि असमानता केवल जाती या वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, जीवन स्तर सब पर असर डालती है. उन्होंने कहा क्लाइमेंट चेंज का असर भी असमान है. गवई ने कहा कि अमीर लोग एसी और संसाधनों से खुद को बचा सकते हैं, लेकिन मजदूर और गरीब वर्ग सीधे प्रभावित होते हैं.

दूरदर्शी नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण में भूमिका

गवई ने कहा कि भारतीय संविधान सिर्फ औपचारिक समानता नही बल्कि वास्तविक समानता चाहता है. उन्होंने पिछले साल सीजेआई रहते हुए डॉक्टर अंबेडकर जयंती के अवसर पर कहा था कि भारतीय संविधान समय की कसौटी पर खरा उतरा है और इसने देश को मजबूत, स्थिर और एकजुटता बनाया है.

उन्होंने यह भी कहा था कि बाबा साहेब अंबेडकर देश के महानतम सपूतों में से एक और एक दूरदर्शी थे, जिन्होंने एक अर्थशास्त्री, एक समाज सुधारक और एक शिक्षाविद के रूप में विभिन्न क्षेत्रों में योगदान दिया.

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-भारत एक्सप्रेस



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