दुष्कर्म के आरोपों का सामना कर रहे सेना के एक कर्नल और उसके दोस्त को दिल्ली के द्वारका कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है. द्वारका कोर्ट ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गगनदीप जिंदल ने शिकायतकर्ता के अविश्वसनीय गवाही का हवाला देते हुए कर्नल और उसके दोस्त को बरी करने का आदेश दिया है.
कोर्ट ने आरोपों को साबित करने के लिए फोरेंसिक या चिकित्सीय साक्ष्य का अभाव तथा मामले की सूचना देने में हुई देरी पर प्रकाश डाला है. कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि जांच में ऐसा कोई वीडियो नही मिला और यहां तक कि सैन्य अधिकारी के मोबाइल फोन के फॉरेंसिक विश्लेषण में भी ऐसा कोई वीडियो सामने नहीं आया है.
शिकायत दर्ज करने में हुई लंबी देरी
कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता वकील है ऐसे में यह नही कहा जा सकता कि उसे वैधानिक अधिकारों की जानकारी नही थी. कर्नल पर भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (2)(एन) (बार-बार दुष्कर्म), धारा 328 (जहर आदि के माध्यम से चोट पहुचाना) और धारा 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया गया था, जबकि दोनों पुरुषों पर आईपीसी की धारा 376 डी (सामुहिक दुष्कर्म) का आरोप लगाया गया था.
कोर्ट ने शिकायतकर्ता के बयान का हवाला देते हुए कहा कि बलात्कार की पहली घटना अक्टूबर 2016 में दिल्ली में हुई थी, और आखिरी घटना अगस्त 2021 में हुई थी जबकि नवंबर 2021में मामला दर्ज कराया गया. कोर्ट ने कहा पहली घटना के पांच साल बाद और दूसरी घटना के तीन महीने से अधिक की देरी से शिकायत दर्ज कराई गई थी.
ये भी पढ़ें: NEET-PG 2025 परीक्षा 3 अगस्त 2025 को कराने की सुप्रीम कोर्ट ने दी अनुमति
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.



