सुप्रीम कोर्ट ने तिरुपति प्रसादम विवाद से जुड़े मामले में आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले पर रोक लगा दिया है. यह याचिका सीबीआई निदेशक की ओर से दायर की गई है. दायर याचिका में हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है. सीजेआई बी. आर गवई, जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ मामले की सुनवाई कर रही है.
SC के आदेशों का हुआ उल्लंघन
मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई बीआर गवई ने कहा कि अगर एसआईटी किसी विशेष अधिकारी की नियुक्ति करना चाहती है, तो इसमें क्या गलत है? हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि सीबीआई डायरेक्टर ने तिरुमाला तिरुपति मंदिर के प्रसाद में मिलावटी घी के आरोपों की जांच के लिए एसआईटी में राज्य के बाहर के अधिकारियों को नियुक्त कर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन किया है.
इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में पहले चार याचिका दायर की गई थी. जिनमें बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी और YSR कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और तिरुमला तिरुपति देवस्थानम ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष YV सुब्बा रेड्डी शामिल थे.
रेड्डी ने मामले की जांच निष्पक्ष कमिटी से करवाने की मांग की थी. इससे पहले बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी, सुरजीत यादव सहित अन्य की ओर से दायर की थी. याचिका में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एसआईटी जांच गठित करने की मांग की गई थी.
तिरुपति लड्डू में चर्बी और मछली का तेल
याचिका में आस्था से खिलवाड़ करने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की भी मांग की गई थी. इससे पहले हिंदू सेना के मुखिया सुरजीत यादव ने याचिका में कहा था कि तिरुपति लड्डू में चर्बी और मछली के तेल के बात सामने आने से करोड़ों हिंदुओं की आस्था को झटका लगा है. जिसपर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी के गठन का आदेश दिया था.
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि गठित एसआईटी की मॉनिटरिंग सीबीआई डायरेक्टर करेंगे. साथ सीबीआई डायरेक्टर की ओर से मनोनीत दो सीबीआई अधिकारी, दो राज्य पुलिस के अधिकारी और एक एफएसएसएआई के अधिकारी इस टीम में शामिल होंगे. हालांकि इसको लेकर राज्य सरकार ने भी एसआईटी का गठन किया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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