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‘तिलचट्टा’ वाली मौखिक टिप्पणी पर CJI सूर्यकांत ने जारी किया स्पष्टीकरण, कहा- युवाओं को नहीं, फर्जी डिग्री वालों को कहा था परजीवी

सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील का दर्जा दिए जाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत की मौखिक टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है.

वरिष्ठ वकील का दर्जा दिए जाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत द्वारा की गई मौखिक टिप्पणी पर सीजेआई ने स्पष्टीकरण जारी किया है. उन्होंने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा था कि वे ‘तिलचट्टों’ जैसे है, जो आगे चलकर मीडिया, सोशल मीडिया और आरटीआई कार्यकर्ता बनकर सिस्टम पर हमले करते है.

सीजेआई द्वारा भेजे गए स्पष्टीकरण में कहा गया है कि यह जानकर बहुत दुख हुआ कि मीडिया के एक वर्ग ने कल एक तुच्छ मामले की सुनवाई के दौरान मेरे मौखिक बयान को गलत तरीके से पेश किया है. उन्होंने कहा कि मैंने विशेष रूप से उन लोगों की आलोचना की थी, जिन्होंने फर्जी और फर्जी डिग्रियों की मदद से वकालत जैसे पेशों में प्रवेश किया है. ऐसे ही लोग मीडिया, सोशल मीडिया और अन्य प्रतिष्ठित पेशे में भी घुसपैठ कर चुके है, और इसलिए वे परजीवियों के समान हैं. सीजेआई ने कहा यह कहना पूरी तरह निराधार है कि मैंने हमारे देश के युवाओं की आलोचना की. मुझे न केवल हमारे वर्तमान और भविष्य के मानव संसाधन पर गर्व है, बल्कि भारत का हर युवा मुझे प्रेरित करता है.

सीजेआई ने कहा यह कहना अतिश्योक्ति नही होगी कि भारतीय युवा के प्रति बहुत आदर और सम्मान रखते हैं और मैं भी उन्हें एक विकसित भारत के स्तंभ के रूप में देखता हूं.अदालत ने कहा  था कि दुनिया में हर कोई सीनियर बनने के योग्य हो सकता है, लेकिन आप इसके हकदार नहीं है. अगर आपको दिल्ली हाई कोर्ट ने सीनियर वकील बना भी दिया, तो सुप्रीम कोर्ट आपके व्यवहार को देखते हुए उस फैसले को रद्द कर देगा.

न्याय प्रणाली में भरोसा बनाए रखने के लिए सख्ती जरूरी- सीजेआई

सीजेआई सूर्यकांत ने साफ किया था कि अदालत फेसबुक, यूट्यूब समेत सोशल मीडिया पर न्यायपालिका के खिलाफ हो रही गतिविधियों पर नजर रख रही है. उन्होंने पूछा, वे जो कुछ भी पोस्ट कर रहे हैं, क्या उन्हें लगता है कि हम देख नहीं रहें हैं? सीजेआई याचिकाकर्ता द्वारा फेसबुक पर कथित तौर पर इस्तेमाल की गई भाषा का भी जिक्र किया और चेतावनी दिया था कि ऐसा बर्ताव लीगल प्रोफेशन के सदस्यों से उम्मीद किए जाने वाले अनुशासन के खिलाफ है.

सीजेआई ने कहा था कि काला कोट पहन लेने भर से कोई व्यक्ति ईमानदार वकील नहीं बन जाता. उन्होंने चिंता जताई कि न्याय व्यवस्था से जुड़े पेशे में अगर फर्जी डिग्री वाले लोग घुसपैठ करेंगे तो इससे आम लोगों का भरोसा कमजोर होगा.

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-भारत एक्सप्रेस 



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