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सोनिया गांधी वोटर लिस्ट केस: 29 अगस्त को आएगा फैसला, जानें क्या है पूरा मामला

Sonia Gandhi voter list case: सोनिया गांधी से जुड़े वोटर लिस्ट मामले में राऊज एवेन्यू कोर्ट अब 29 अगस्त को फैसला सुनाएगा. जानें 1980 की मतदाता सूची, 1983 की नागरिकता और कोर्ट में हुई दलीलों का पूरा मामला.

Edited by Sahil Singh

Sonia Gandhi voter list case: कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी का नाम भारतीय नागरिकता हासिल करने से पहले मतदाता सूची में शामिल किए जाने के आरोपों से जुड़े मामले में राऊज एवेन्यू कोर्ट 29 अगस्त को फैसला सुनाएगा. मामले की सुनवाई कर रहे स्पेशल जज डॉ. विशाल गोगने के अवकाश पर होने के कारण फैसला सुनाए जाने की तारीख टाल दी गई है. पिछली सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था.

क्या है पूरा मामला?

यह रिविजन पिटीशन वकील विकास त्रिपाठी की ओर से दायर की गई है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि सोनिया गांधी का नाम 1980 में नई दिल्ली लोकसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज किया गया था, जबकि उन्हें भारतीय नागरिकता अप्रैल 1983 में मिली थी.

याचिकाकर्ता का तर्क है कि भारतीय मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए भारतीय नागरिक होना आवश्यक है. ऐसे में नागरिकता हासिल करने से पहले सोनिया गांधी का नाम मतदाता सूची में शामिल किए जाने को लेकर जांच की जानी चाहिए. याचिका में इसे कथित तौर पर जाली दस्तावेज या धोखाधड़ी से जुड़ा मामला बताया गया है.

अदालत ने जांच की मांग पर उठाए सवाल

पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता से पूछा था कि करीब आधी सदी पुराने मामले में एफआईआर दर्ज कराने और जांच की मांग किस आधार पर की जा रही है और अब किसकी जांच की जाएगी. अदालत ने यह भी कहा था कि उपलब्ध जानकारी फिलहाल केवल मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की परिस्थितियों से संबंधित है.

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि उन्होंने मतदाता सूची की प्रमाणित प्रति हासिल की है और उनका दावा है कि एक विदेशी नागरिक द्वारा घोषणा पत्र के जरिए नाम दर्ज कराया गया था. उनके मुताबिक, यह प्रक्रिया जाली दस्तावेज या धोखाधड़ी के बिना संभव नहीं हो सकती थी.

सोनिया गांधी की ओर से आरोपों का विरोध

सोनिया गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर.एस. चीमा ने याचिका का विरोध किया. सुनवाई के दौरान अदालत ने इस सवाल पर भी चर्चा की कि यदि सोनिया गांधी 1980 में मतदाता सूची में दर्ज थीं, जबकि 1983 में भारतीय नागरिक बनीं, तो इस स्थिति को कैसे समझाया जाए.

इस पर सोनिया गांधी के वकील ने सवाल उठाया कि क्या ऐसा कोई सबूत है कि नागरिकता के लिए आवेदन करने से पहले वह भारतीय नागरिक थीं. अदालत ने याचिकाकर्ता की जांच की मांग को लेकर टिप्पणी करते हुए इसे चुनाव आयोग के अधिकारियों के खिलाफ व्यापक और अनिश्चित जांच की कोशिश बताया.


ये भी पढ़ें: नीट-यूजी पेपर लीक मामले में सीबीआई द्वारा दायर चार्जशीट पर राऊज एवेन्यु कोर्ट ने लिया संज्ञान


मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश को दी गई चुनौती

इससे पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट ने विकास त्रिपाठी की शिकायत को खारिज कर दिया था. इसके खिलाफ उन्होंने सेशन कोर्ट में रिविजन पिटीशन दाखिल की. याचिका में 1980 की नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में सोनिया गांधी का नाम शामिल होने और 1983 में भारतीय नागरिकता मिलने के बीच के अंतर को आधार बनाया गया है.

सोनिया गांधी के खिलाफ यह आरोप पहले भी राजनीतिक बहस का हिस्सा रहा है. बीजेपी की ओर से भी पूर्व में दावा किया गया था कि उनका नाम भारतीय नागरिकता मिलने से पहले ही मतदाता सूची में शामिल कर लिया गया था. अब राऊज एवेन्यू कोर्ट इस मामले में 29 अगस्त को अपना फैसला सुनाएगा.

-भारत एक्सप्रेस



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