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विवादास्पद कार्टून बनाने वाले हेमंत मालवीय 50 साल की उम्र में भी मैच्योर नही: सुप्रीम कोर्ट

विवादास्पद कार्टून मामले में कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय की अग्रिम जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट में पहुंची है. हाई कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा था कि उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग किया है.

Supreme Court
Edited by Radha Priya

Controversial Cartoon: विवादास्पद कार्टून बनाने वाले इंदौर के कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय की ओर से दायर अग्रिम जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 15 जुलाई को सुनवाई करेगा.

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस सुधांशू धुलिया की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता 50 साल के हैं, फिर भी परिपक्वता नहीं है. हम मानते हैं कि यह कार्टून भड़काऊ है.

कार्टून आक्रमक हो सकता है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि वह अपराध हो. कोर्ट ने यह भी पूछा कि ट्वीट सिर्फ हटाना काफी है या माफी भी चाहिए?

हाई कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका की खारिज

कोर्ट ने कहा कि हम मानते हैं और यह भड़काऊ है. मामले की.सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील वृंदा ग्रोवर ने कहा कि कार्टून 2021 का है, जब कोविड वैक्सीन को लेकर भ्रम फैला हुआ था. यह सिर्फ एक व्यंग्य था, किसी प्रकार की कानून व्यवस्था की स्थिति नही बिगड़ी. कार्टून के नीचे की टिप्पणियां किसी और ने जोड़ी है. मालवीय ने नही.

उन्होंने कहा कि मालवीय पोस्ट हटाने को तैयार है. वही सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के. एम नटराज ने कहा कि यह पोस्ट सामाजिक वैमनस्य पैदा करता है और कानून व्यवस्था के लिए खतरा है. अगर यह आक्रामक है तो यह अपराध भी है. हेमंत मालवीय पर विवादास्पद कार्टून बनाने का आरोप है.

हाई कोर्ट मालवीय को यह कहते हुए अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया था कि मालवीय ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग किया है और उन्हें विवादित कैरिकेचर बनाते समय विवेक का इस्तेमाल करना चाहिए था.

हेमंत मालवीय ने अपनी फेसबुक पेज पर कुछ कार्टून, कमेंट, फोटो और वीडियो पोस्ट किए थे. इनमें भगवान शिव, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस कार्यकर्ता विनय जोशी ने लसूड़िया थाने में शिकायत दर्ज कराई थी.

उनके अनुसार हेमंत मालवीय द्वारा पोस्ट किया गया कार्टून न केवल प्रधानमंत्री और संघ के प्रति आपत्तिजनक है, बल्कि इसका उद्देश्य हिंदू धर्म की भावनाओं को ठेस पहुचाना भी है. उन्होंने इस सामग्री को अश्लील और भड़काऊ करार दिया, जिसे सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश बताया गया.

मालवीय पर पहले भी हो चुके हैं कई मुकदमे

बता दें कि मालवीय अपने कार्टूनों के जरिये राजनीतिक मुद्दों पर टिप्पणी के लिए जाने जाते हैं. यह पहली बार नहीं है जब उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया हो.

इससे पहले वर्ष 2022 में उन पर उत्तराखंड पुलिस ने योग गुरु रामदेव के कथित अश्लील पोस्टर बनाने के आरोप में केस दर्ज किया गया था.

दिसंबर 2022 में पीएम मोदी की मां की मौत के बाद कथित रूप से अपमानजनक बयान देने के लिए इंदौर पुलिस ने उनके खिलाफ मामला दर्ज किया था.

-भारत एक्सप्रेस


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