दिल्ली की सीबीआई कोर्ट ने सफदरजंग को ऑपरेटिव सोसाइटी मामले में 13 दोषियों को अलग-अलग सजा सुनाई है. राऊज एवेन्यु कोर्ट के स्पेशल जज प्रशांत शर्मा ने फैसले के दौरान कहा कि सिर्फ कीमोथेरेपी जैसा ईलाज ही समाज को इससे ठीक कर सकता है. इसलिए भ्रष्टाचार के अपराध से सख्ती से निपटना होगा.
हजारों घर खरीदारों को धोखा
जज ने चेतावनी दी कि भ्रष्टाचार को लोहे के हाथों से कुचलना होगा. इस सोसाइटियों को फिर से शुरू करने के लिए जालसाजी और भ्रष्टाचार किया गया. इसका इस्तेमाल करके दोषियों ने हजारों संभावित घर खरीदारों को धोखा दिया.
कोर्ट ने इस मामले में करमवीर सिंह, नरेंद्र कुमार, महा नान शर्मा, पंकज मदान, आहवानी शर्मा, आशुतोष पंत, सुदर्शन टंडन, मनोज वत्स, विजय ठाकुर, विकास मदान और पूनम अवस्थी नामक 11 दोषियों को पांच साल के कारावास और जुर्माना की सजा सुनाई है. साथ ही गोपाल दीक्षित (सेवानिवृत्त आईएएस) और नरेंद्र धीर (90 वर्षीय) नामक दो दोषियों को दो साल के कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है.
भ्रष्टाचार लोकतंत्र व सामाजिक व्यवस्था का बैरी
सीबीआई ने आईपीसी की धाराओं के अलावा भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत केस दर्ज किया था, जिसमें साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप लगे. अदालत ने कहा कि भ्रष्टाचार लोकतंत्र और सामाजिक व्यवस्था का बैरी है. यह अर्थव्यवस्था को खोखला करता है और सांस्कृतिक विरासत को नष्ट. अगर शुरू में ही इसे नहीं रोका गया तो समाज में उथल-पुथल मच जाएगी.
अदालत ने स्पष्ट किया कि आम आदमी का न्याय व्यवस्था पर भरोसा डगमगाना नहीं चाहिए, इसलिए हल्की सजा नहीं चलेगी. कोर्ट ने दोषियों की उस मांग को खारिज कर दिया जिसमें वे चाहते थे कि जज इस बात पर ध्यान दें कि उनके परिवार हैं जिनकी उन्हें देखभाल करनी है. कोर्ट ने दोषियों के पूछा कि अगर वे अपने परिवार को लेकर इतने चिंतित है और संवेदनशील थे, तो उन्हें ये अपराध क्यों किया.
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-भारत एक्सप्रेस
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