दिल्ली की एक अदालत ने भाजपा सांसद योगेंद्र चंदोलिया के खिलाफ पांच साल पुराने एक आपराधिक मामले में आरोप तय किए हैं. मामला एक सरकारी कर्मचारी से कथित मारपीट से जुड़ा है. चंदोलिया पर 2020 में दिल्ली के प्रसाद नगर थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी. आरोप है कि उन्होंने एक सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी करने से रोका और उसके साथ बदसलूकी की.
अदालत ने कई धाराओं के तहत आरोप किए तय
एडिशनल चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट नेहा मित्तल की अदालत ने योगेंद्र चंदोलिया पर IPC की धारा 341, 353 और 356 के तहत आरोप तय किए हैं. हालांकि, कोर्ट ने धारा 186 से उन्हें बरी कर दिया है. अगली सुनवाई 22 मई को होगी.
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जानें क्या है मामला?
2020 में एक सरकारी सेवक ने शिकायत की थी कि योगेंद्र चंदोलिया ने उनके काम में बाधा डाली और उन्हें डराने की कोशिश की. इसके बाद चंदोलिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी. मामले में सबसे पहले तीस हजारी कोर्ट ने उन्हें समन भेजा था. बाद में चुनाव जीतने के बाद केस को राउज एवेन्यू कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया.
चंदोलिया ने क्या कहा?
चंदोलिया की ओर से पेश वकील ने कहा कि मामला झूठा है. कोई गवाह नहीं है, ना ही कोई मोबाइल फोन बरामद हुआ है. उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं है. उन्होंने एफआईआर रद्द करने के लिए याचिका भी दाखिल की है. कोर्ट इस याचिका पर 19 मई को सुनवाई करेगा.
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