सांकेतिक तस्वीर.
तीस हजारी कोर्ट ने दिल्ली सरकार से एसिड अटैक के तीन पीड़ितों को लगभग 20 लाख रु पए का मुआवजा देने का निर्देश दिया है. उक्त राशि उन छह लाख रुपए से अलग है जो पहले दिए गए थे. मुआवजा पाने वालों में पिता व दो पुत्रियां है. तीस हजारी कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अदिति गर्ग ने ने सरकार से यह भी कहा है कि वह एक बालिग स्नातक लड़की को उसकी योग्यता एवं मेडिकल स्थिति के अनुसार रोजगार मुहैया कराए.
आरोपी को 10 साल की सजा और जुर्माना
न्यायाधीश ने इसके साथ ही आरोपी राघव मुखिया को 10 साल की कठोर कारावास एवं 20 हजार रुपए जुर्माना किया है. यह घटना 18 फरवरी, 2017 की है. उस समय पश्चिमी दिल्ली के खयाला के विष्णु गार्डन इलाके में एक व्यक्ति एवं उसकी 14 व 11 वषीय दो बेटियों पर एसिड से हमला किया गया था. न्यायाधीश ने कहा कि इस घटना ने दोनों लड़कियों के बचपन को नष्ट कर दिया. वहीं उसके पिता से रोजगार का अवसर छीन लिया गया.
उन्होंने कहा कि एसिड अटैक का भयावह और अमानवीय कृत्य तेजी से बढ़ा है. यह दुनिया भर में धर्म, लिंग और जाति से परे चला गया है. एसिड अटैक केवल महिलाओं के खिलाफ ही नहीं बल्कि नाबालिग बच्चों के खिलाफ भी होते हैं और यह बदला लेने या दुश्मनी के कारण हो सकता है. अपराधी का उद्देश्य पीड़ित को मारना नहीं होता बल्कि उन्हें अपंग अवस्था में छोड़ना होता है जिससे उनके दैनिक कार्य बाधित हो. जिससे समाज उसे स्वीकार नहीं करें.
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न्यायमूर्ति ने यह भी कहा कि एसिड अटैक शरीर पर निशान और चोटें छोड़ जाता है जो ठीक नहीं होते हैं. उसमें त्वचा पर एसिड अटैक के प्रभावों में अंधापन और स्थायी निशान हैं. यह विनाशकारी है. लेकिन निशान केवल शारीरिक नहीं होते हैं. इस तरह की हिंसा और उसके परिणामस्वरूप होने वाली विकृति में मनोवैज्ञानिक निशान भी शामिल होते हैं, जो आत्म-पहचान और बहुत कुछ के रूप में प्रकट होते हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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