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व्यभिचार के मामलों में कथित प्रेमी को बनाना होगा पक्षकार: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाई कोर्ट ने व्यभिचार के मामले में कहा है कि व्यभिचार के आधार पर तलाक की याचिका दायर करते समय कथित प्रेमी या प्रेमिका को पक्षकार बनाना अनिवार्य है. जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की पीठ ने यह फैसला दिया है.

delhi high court
Edited by Vaibhav Gupta

दिल्ली हाई कोर्ट ने व्यभिचार के मामले में कहा है कि व्यभिचार के आधार पर तलाक की याचिका दायर करते समय कथित प्रेमी या प्रेमिका को पक्षकार बनाना अनिवार्य है. जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की पीठ ने यह फैसला दिया है.

व्यभिचार आरोप सिद्ध होने पर गरिमा पर होता है असर

कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि व्यभिचार के आरोप सिद्ध होने पर तीसरे पक्ष की प्रतिष्ठा और गरिमा पर असर पड़ता है. कोर्ट ने कहा बिना सुनवाई का मौका दिए किसी पर ऐसे आरोप तय करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है.

हाई कोर्ट ने कहा फैमिली कोर्ट कथित प्रेमी की उपस्थिति के बिना निष्पक्ष निर्णय नहीं दे सकता. दिल्ली हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि यह नियम केवल प्रक्रिया की सुविधा नहीं बल्कि न्याय की आवश्यकता है. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि तलाक से जुड़ी कार्यवाही में व्यभिचार का पूरा विवरण प्रस्तुत करना जरूरी है.

व्यभिचार पर आधारित तलाक का आदेश नहीं

इसमें उस व्यक्ति की पहचान भी शामिल होनी चाहिए जिसके साथ कथित रूप से संबंध रहे हो. दिल्ली हाई कोर्ट ने पुराने फैसले का हवाला देते हुए कहा कि यह सिद्धांत पहले भी मान्य किया गया है. कोर्ट ने कहा कि पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने कहा था कि कथित व्यभिचार पर आधारित तलाक का आदेश नहीं दिया जा सकता है.

कोर्ट ने राजेश देवी बनाम जय प्रकाश और पद्यावती बनाम साई बाबू जैसे मामलों का हवाला भी दिया है. बता दें कि इस मामले में पत्नी ने पति पर व्यभिचार और क्रूरता का आरोप लगाते हुए तलाक की याचिका दायर की थी. उसने याचिका में कथित प्रेमी को भी सह-प्रतिवादी बनाया.

बाद में कथित प्रेमी ने अपना नाम पक्षकारों की सूची से हटाने की मांग की, लेकिन फैमिली कोर्ट ने उसकी इस मांग को खारिज कर दिया था. जिसके खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है.

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-भारत एकस्प्रेस



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