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बिना सबूत अवैध प्रवासियों को देश से नहीं निकाल सकते- दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाई कोर्ट ने अवैध प्रवासियों को लेकर दायर याचिका को खारिज करते हुए कहा कि केवल सामान्य और बिना सबूत वाले आरोपों के आधार पर प्रशासन को अवैध प्रवासियों की पहचान कर निर्वासन की कार्रवाई करने का निर्देश नहीं दिया जा सकता.

दिल्ली में संपत्तियों के फ्रीहोल्ड कन्वर्जन में देरी पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी.

दिल्ली में संपत्तियों के फ्रीहोल्ड कन्वर्जन में देरी पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी.

दिल्ली हाई कोर्ट ने अवैध प्रवासियों को लेकर दायर उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उनको उनके देश भेजने की मांग की गई थी. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि केवल सामान्य और बिना सबूत वाले आरोपो के आधार पर प्रशासन को अवैध प्रवासियों की पहचान कर उन्हें निर्वासित करने का आदेश नही दिया जा सकता है.

जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने कहा कि याचिका केवल व्यापक और अस्पष्ट आरोपों पर आधारित है. किसी भी व्यक्ति की पहचान या आरोपों के समर्थन में प्रथम दृष्टया कोई विश्वसनीय सामग्री पेश नही की गई. ऐसे में कोर्ट प्रशासन को व्यापक जांच या निर्वासन की कार्रवाई करने का निर्देश नही दे सकता है.

एम. ए. बर्नी की याचिका पर सुनवाई

कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा है कि निर्वासन का फैसला कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र का विषय है और अदालत तभी हस्तक्षेप कर सकती है जब पर्याप्त कानूनी आधार और ठोस सबूत मौजूद हों. यह याचिका एम. ए. बर्नी ने दायर किया था. याचिका में दावा किया गया था कि बांग्लादेश, रोहिंग्या और अन्य देशों के अवैध प्रवासी कालिंदी कुंज, बाटला हाउस, शाहीन बाग, श्रम विहार, तैमूर नगर और मजनू का टीला जैसे इलाको में रह रहे है. उन्होंने इन लोगों को उनके देशों में वापस भेजने, उन्हें शरण देने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी.

मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता ने इस संबंध में सरिता विहार थाने में कोई औपचारिक शिकायत नहीं दी थी. पुलिस की जांच में भी संबंधित इलाको में अवैध पर प्रवासियों के रहने का कोई प्रमाण नही मिला. पुलिस ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता ने किसी भी कथित अवैध प्रवासी का नाम या विवरण उपलब्ध नहीं कराया, जिससे जांच करना संभव नही था.

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-भारत एक्सप्रेस



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