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जंतर-मंतर की जमीन पर ‘जंग’: दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकारों से मांगा जवाब, क्या कांग्रेस को मिलेगा मालिकाना हक?

Jantar Mantar Road property: दिल्ली हाई कोर्ट ने जंतर-मंतर संपत्ति विवाद में केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है. कांग्रेस का दावा है कि 1959 में पूरा भुगतान करने के बावजूद उन्हें अब तक मालिकाना हक (Ownership rights) नहीं मिला है.

Delhi high court
Edited by Shubhra Rai

Central Government Notice: दिल्ली हाई कोर्ट ने राजधानी के पॉश इलाके जंतर-मंतर रोड पर स्थित एक महत्वपूर्ण संपत्ति के मालिकाना हक को लेकर दायर याचिका पर केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है. यह मामला दशकों पुराने आवंटन और सेल डीड (बिक्री विलेख) के निष्पादन से जुड़ा है, जिस पर कांग्रेस पार्टी अपना दावा पेश कर रही है.

दिल्ली हाई कोर्ट ने जंतर-मंतर रोड स्थित संपत्ति के मालिकाना हक को लेकर केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. कांग्रेस का दावा है कि 1956 में आवंटित इस जमीन के लिए उन्होंने 1959 में ही ₹6,10,700 का पूर्ण भुगतान कर दिया था, लेकिन सरकार ने अब तक सेल डीड निष्पादित नहीं की है. कोर्ट ने याचिका की वैधानिकता पर संदेह जताते हुए अगली सुनवाई 14 सितंबर के लिए तय की है.

सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा

दिल्ली हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय नेशनल की ओर से दायर याचिका पर केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. जस्टिस पुरुषेंद्र कौरव की बेंच ने यह नोटिस जारी किया है. कोर्ट 14 सितंबर को अगली सुनवाई करेगा. हालांकि कोर्ट ने दायर याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं इसपर संदेह व्यक्त किया है.

वकील सिंघवी ने क्या कहा?

कोर्ट ने स्पष्ट किया गया अंतरिम राहत की याचिका पर तभी विचार किया जाएगा, जब कांग्रेस कोर्ट को याचिका के मेंटेनेबिलिटी के बारे में संतुष्ट कर देगी. यह मामला जंतर-मंतर रोड़ स्थित संपत्ति के बिक्री अथवा निष्पादन से जुड़ा हुआ है. मामले की सुनवाई के दौरान कांग्रेस की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि कांग्रेस इस संपत्ति की विधिवत आवंटी है और कई दशकों से उसके कब्जे में है, लेकिन बार-बार अनुरोध के बावजूद दिल्ली सरकार हस्तांतरण विलेख निष्पादित नहीं कर रही है.

6 लाख 10 हजार 700 रुपये की राशि तय

बता दें कि दायर याचिका में कांग्रेस ने दावा किया है कि उसने वर्ष 1959 में ही इस संपत्ति की पूरी बिक्री राशि जमा कर दी थी. कांग्रेस पार्टी के अनुसार भारत सरकार ने वर्ष 1956 में यह संपत्ति कांग्रेस को आवंटित की थी और 6 लाख 10 हजार 700 रुपये की राशि तय के साथ अतिरिक्त प्रीमियम और भू-भाड़ा भी मई 1959 में जमा करा दिया गया था.

कुल 610700 की बिक्री राशि

दायर याचिका में यह भी कहा गया है कि पुनर्वास मंत्रालय ने 16 जनवरी 1956 के पत्र के जरिए संपत्ति के एक हिस्से का आवंटन मंजूर किया था और विस्थापित संपत्ति संरक्षक को इसे जारी करने के निर्देश दिए थे. इसके बाद 31 जनवरी 1956 के एक अन्य पत्र में कांग्रेस से प्रतिनिधि भेजकर आवंटन पत्र प्राप्त करने और संपत्ति का कब्जा लेने को कहा गया था. कांग्रेस का कहना है कि उसने इस संपत्ति के लिए पूरी बिक्री राशि सरकार को अदा कर दी थी.

याचिका नेशनल कांग्रेस ने 21 मई 1959 को चलानो के माध्यम से कुल 610700 की बिक्री राशि, अतिरिक्त प्रीमियम और वार्षिक ग्राउंड रेंट का भुगतान किया. इसके बावजूद संपत्ति की सेल डीड/कन्वेयन डीड अब तक कांग्रेस के नाम पर नहीं कि गई.

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-भारत एक्सप्रेस



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