दिल्ली हाई कोर्ट
Delhi High Court: दिल्ली में लीजहोल्ड संपत्तियों को फ्रीहोल्ड में बदलने की नीति को अंतिम रूप देने में लगातार हो रही देरी पर दिल्ली हाई कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है. कोर्ट अगली सुनवाई में केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय और दिल्ली विकास प्राधिकरण के अधिकारियों को अगली सुनवाई में पेश होने को कहा है.
कोर्ट में 28 सितंबर को मामले में अगली सुनवाई
जस्टिस एम प्रतिभा सिंह और जस्टिस विकास महाजन की बेंच ने केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय, दिल्ली विकास प्राधिकरण और लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि ‘स्कोर्स ऑफ सिटीजन्स’ यानी बड़ी संख्या में नागरिकों को इस तरह अपनी संपत्तियों के फ्रीहोल्ड कन्वर्जन के लिए इंतजार नहीं कराया जा सकता है. कोर्ट ने अधिकारियों को आखिरी मौका देते हुए कहा है कि लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड कन्वर्जन की पूरी और स्पष्ट नीति अगली सुनवाई से कम से कम तीन दिन पहले कोर्ट में पेश किया जाए. कोर्ट 28 सितंबर को मामले में अगली सुनवाई करेगा.
स्थिति स्पष्ट नहीं होने की वजह से फ्रीहोल्ड कन्वर्जन अटक गया
बता दें कि वर्ष 2020 से 2026 के बीच में लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड रूपांतरण के 1,373 अर्जी लंबित है. इन अर्जियों के तहत डीडीए को 155.06 करोड़ रुपए कन्वर्जन शुल्क के तौर पर पहले ही वसूला जा चुका है. इनमें से 308 मामलों में कन्वर्जन की मंजूरी भी दी जा चुकी है, लेकिन संबंधित संपत्तियों की केन्वेयन्स डीड अभी तक निष्पादित नहीं हुआ है. यानी कई मामलों में लोगों ने पैसा जमा कर दिया. प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद थी, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर नीति और शुल्क को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण संपत्तियों का फ्रीहोल्ड कन्वर्जन अटक गया है.
कोर्ट ने निर्देश दिया है कि ऐसे सभी आवेदनों पर पेमेंट के समय लागू नीति के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए. लीजहोल्ड प्रॉपर्टी को फ्रीहोल्ड में बदलने का मतलब है कि संपत्ति और उस पर बनी जमीन का पूरा और स्थायी स्वामित्व प्राप्त करना.
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-भारत एक्सप्रेस
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