सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक कैडर की आईएएस अधिकारी रोहिणी सिंदूरी को मिली अंतरिम राहत को बरकरार रखा है. जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने यह निर्देश दिया है. कोर्ट नवंबर में विस्तृत सुनवाई करेगा.
मामले की सुनवाई के दौरान सिंदूरी की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि यह मामला भ्रष्टाचार से जुड़ा है. हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को एफआईआर दर्ज करने के लिए आवश्यक मंजूरी देने का निर्देश दिया है और इस संबंध में नोटिस जारी हो चुका है. रोहिणी सिंदूरी ने कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.
क्या है मामला?
यह मामला इको-फ्रेंडली कपड़े के बैग की खरीद से जुड़े कथित घोटाले से संबंधित है. जिसपर कर्नाटक हाई कोर्ट ने आईएएस रोहिणी सिंदूरी के खिलाफ जांच की मंजूरी देने का निर्देश दिया था. जिसके खिलाफ सिंदूरी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है.
मामले की सुनवाई के दौरान कर्नाटक सरकार की ओर से पेश वकील ने कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले का विरोध किया था. वहीं रोहिणी सिंदूरी की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया था कि राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत मंजूरी देने से इनकार कर दिया था, क्योंकि कि अनुशासनात्मक जांच में उनकी कोई गलती नहीं पाई गई है.
आपराधिक जांच से बचने के लिए राहत नहीं
कर्नाटक हाई कोर्ट ने 1 अप्रैल को दिए गए अपने फैसले में कहा था कि सरकार चार सप्ताह के भीतर जांच की स्वीकृति दी. अदालत ने स्पष्ट किया था कि विभागीय जांच में किसी अधिकारी को मिली राहत का इस्तेमाल आपराधिक जांच से बचने के लिए नहीं किया जा सकता है.
हाई कोर्ट ने यह फैसला रविचंद्र गौड़ा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद दिया था. शिकायतकर्ता ने राज्य सरकार के उस फैसले को चुनौती दी थी कि, जिसमें प्रारंभिक जांच की मंजूरी नहीं दी गई थी.
अनियमित खरीद से 7.6 करोड़ रुपए का नुकसान
रोहिणी सिंदूरी पर आरोप है कि 31 जुलाई 2026 मैसूरु की डिप्टी कमिश्नर के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने 52 रुपए प्रति बैग की दर से कपड़े के बैग खरीदे, जबकि वैसी ही क्वालिटी के बैग रिटेल मार्केट में आसानी से13 रुपये में मिल रहे थे.
शिकायतकर्ता का दावा है कि इस कथित अनियमित खरीद के कारण सरकारी खजाने को लगभग 7.6 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ. आईएएस अधिकारी ने इससे पहले 2021 में शहर की कमिश्नर रहते हुए प्लास्टिक बैग पर रोक लगाने और मैसूरु के निवासियों को पर्यावरण के अनुकूल कपड़े के बैग बांटने का फैसला किया था.
हाई कोर्ट ने कहा था कि इन आरोपों की निष्पक्ष आपराधिक जांच होना जरूरी है और केवल विभागीय स्तर पर मिली क्लीन चिट के आधार पर जांच को रोका नहीं जा सकता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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