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11 महिला वकीलों की सफलता बनी मिसाल, दिल्ली हाई कोर्ट ने 85 अधिवक्ताओं को दी नई जिम्मेदारी

Delhi High Court: दिल्ली हाई कोर्ट ने 85 अधिवक्ताओं को सीनियर एडवोकेट का दर्जा दिया. सूची में 11 महिला वकील भी शामिल हैं, जिन्होंने संघर्ष और सफलता की प्रेरक कहानियां साझा कीं.

Delhi High Court

Edited by Sahil Singh

Delhi High Court: दिल्ली हाई कोर्ट ने 85 अधिवक्ताओं को वरिष्ठ अधिवक्ता (सीनियर एडवोकेट) का दर्जा प्रदान किया है. इस सूची में 11 महिला वकील भी शामिल हैं, जिन्होंने अपने लंबे कानूनी सफर, संघर्ष और उपलब्धियों को साझा करते हुए युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक संदेश दिए. सूची में कनिका अग्निहोत्री, वारिशा फरासत, अमित प्रसाद, संजय लाव, अंकुर छिब्बर, अनुपम एस. शर्मा और पवन दुग्गल जैसे चर्चित नाम भी शामिल हैं.

महिलाओं को होती है चुनौतियां

करीब 32 वर्षों से वकालत कर रहीं अभा मल्होत्रा ने बताया कि उन्होंने सशस्त्र बलों, वाणिज्यिक विवादों और मध्यस्थता से जुड़े मामलों में काम किया है. उन्होंने अपने करियर का सबसे महत्वपूर्ण मुकदमा एचएमएम बनाम भारत संघ को बताया और कहा कि उन्हें कभी लैंगिक भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा. उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय परिवार को देते हुए वरिष्ठ महिला वकीलों से नई पीढ़ी का मार्गदर्शन करने की अपील की.

अमृत कौर ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने अपने पेशे से समझौता नहीं किया. वहीं अंजू भट्टाचार्य और बीनाशॉ नंदा सोनी ने पहली पीढ़ी की वकील होने के नाते शुरुआती संघर्ष, पारिवारिक जिम्मेदारियों और लैंगिक पूर्वाग्रह जैसी चुनौतियों का जिक्र किया.

कनिका अग्निहोत्री और ममता तिवारी ने अपनी सफलता का श्रेय परिवार, सहयोगियों और अच्छे मार्गदर्शकों को दिया. उन्होंने कहा कि सही मार्गदर्शन और निरंतर मेहनत किसी भी वकील के करियर की सबसे बड़ी पूंजी है.


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370 कानून का हिस्सा भी रहीं

मनाली सिंघल ने दिव्यांगजनों के अधिकारों से जुड़े मामलों को अपने करियर का सबसे यादगार अनुभव बताया. मनीषा धीर, राजेश्वरी हरिहरन और संगीता भारती ने दिवाला कानून, बौद्धिक संपदा, जल विवाद और मध्यस्थता से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में अपनी भूमिका को उल्लेखनीय बताया.

वरिष्ठ अधिवक्ता बनीं वारिशा फरासत ने संविधान पीठ के समक्ष अनुच्छेद 370 पर बहस को अपने करियर का सबसे अहम पड़ाव बताया. उनका कहना है कि ऐसे संवैधानिक मामलों में पक्ष रखना किसी भी वकील के लिए सम्मान की बात होती है.

इन महिला अधिवक्ताओं की यात्रा यह साबित करती है कि सफलता केवल कानूनी ज्ञान से नहीं, बल्कि मेहनत, धैर्य, परिवार के सहयोग और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना से भी हासिल होती है. उनके अनुभव नई पीढ़ी, विशेषकर महिला वकीलों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं.

-भारत एक्सप्रेस



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