Bharat Express DD Free Dish
Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital
Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital

BS-VI नियमों पर वकीलों को बड़ी राहत, कोर्ट के कार्यदिवसों में चला सकेंगे पुरानी गाड़ियां; जानें नया आदेश

Delhi High Court: दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड गैर-BS-VI वाहनों के इस्तेमाल पर लगी पाबंदी से वकीलों और कोर्ट कर्मचारियों को सीमित राहत दी है. अब वकील और न्यायिक कर्मचारी अदालत के कार्यदिवसों में अपने ऐसे वाहनों से दिल्ली आ-जा सकेंगे। यह छूट केवल कोर्ट के कामकाज वाले दिनों के लिए होगी.

Delhi High Court
Edited by Swati Pandey

Delhi High Court: दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए लागू किए जा रहे BS-VI उत्सर्जन मानकों को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने वकीलों और कोर्ट कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है. हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड ऐसे वाहन, जो BS-VI उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करते हैं, उनके इस्तेमाल पर लगी पाबंदी वकीलों और न्यायिक कर्मचारियों पर लागू नहीं होगी. हालांकि, यह छूट केवल अदालतों के कार्यदिवसों तक सीमित रहेगी. यानी वकील और कोर्ट स्टाफ सिर्फ कोर्ट के कामकाज वाले दिनों में ही इन वाहनों का इस्तेमाल कर सकेंगे. जस्टिस अमित महाजन की पीठ ने दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया. कोर्ट के इस फैसले से एनसीआर के उन वकीलों और न्यायिक कर्मचारियों को राहत मिलेगी, जो रोजाना दिल्ली आकर अदालतों में काम करते हैं.

सिर्फ कोर्ट के कार्यदिवसों में मिलेगी छूट

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया है कि BS-VI मानकों का पालन नहीं करने वाले दिल्ली के बाहर पंजीकृत वाहनों को वकील और कोर्ट कर्मचारी अदालत के कार्यदिवसों में इस्तेमाल कर सकेंगे. यह राहत सामान्य दिनों या निजी यात्राओं के लिए नहीं होगी. इस फैसले से नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और एनसीआर के दूसरे इलाकों से दिल्ली आने वाले वकीलों को राहत मिलने की उम्मीद है. इन शहरों में रहने वाले कई वकील और न्यायिक कर्मचारी रोजाना अपने निजी वाहनों से दिल्ली की अदालतों तक पहुंचते हैं.

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने भी उठाई थी छूट की मांग

BS-VI नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने भी चिंता जताई थी. एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल को पत्र लिखकर दिल्ली-एनसीआर के बाहर से आने वाले वकीलों को प्रस्तावित प्रतिबंधों से छूट देने की मांग की थी. पत्र में कहा गया था कि नए प्रतिबंधों के कारण नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और एनसीआर के अन्य क्षेत्रों से आने वाले वकीलों को परेशानी हो सकती है. इससे उनकी अदालतों तक पहुंच प्रभावित होगी और न्यायिक प्रक्रिया में भी बाधा आ सकती है. एससीबीए का कहना था कि कई वकील रोजाना निजी वाहनों से सुप्रीम कोर्ट पहुंचते हैं. अचानक प्रतिबंध लागू होने से उनके लिए वैकल्पिक परिवहन की व्यवस्था करना आसान नहीं होगा. इससे मुकदमों की पैरवी, सुनवाई में उपस्थिति और अदालती कामकाज प्रभावित हो सकता है.

हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने भी लिखा था पत्र

इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने भी इस मुद्दे पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश और उपराज्यपाल को पत्र लिखा था. एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील एन. हरिहरन ने पत्र के जरिए न्यायिक अधिकारियों, वकीलों और कोर्ट कर्मचारियों को प्रस्तावित प्रतिबंधों से छूट देने की मांग की थी. एसोसिएशन का तर्क था कि दिल्ली में मकान और रहने का खर्च काफी ज्यादा है. इसी वजह से बड़ी संख्या में वकील, जज और न्यायिक कर्मचारी गुरुग्राम, नोएडा और गाजियाबाद जैसे आसपास के शहरों में रहते हैं. ऐसे में उनके वाहनों पर प्रतिबंध लगने से रोजाना अदालत पहुंचना मुश्किल हो सकता है.

1 नवंबर 2026 से सख्त होंगे प्रदूषण नियंत्रण के नियम

बता दें कि दिल्ली में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए 1 नवंबर 2026 से गैर-BS-VI वाहनों के प्रवेश पर सख्ती की तैयारी है. इसके तहत दिल्ली के बाहर पंजीकृत BS-VI मानकों का पालन नहीं करने वाले पेट्रोल और डीजल वाहनों पर प्रतिबंध लगाया जाना है. हालांकि, CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है. ऐसे में दिल्ली हाई कोर्ट का ताजा आदेश वकीलों और कोर्ट कर्मचारियों के लिए अहम राहत लेकर आया है. इससे एनसीआर से दिल्ली आने वाले न्यायिक पेशेवरों को अदालत के कामकाज वाले दिनों में अपने वाहनों से आवाजाही करने में सहूलियत मिलेगी.

भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital