‘द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) के कथित कार्यकर्ता अर्सलान फिरोज अहेनगर को राहत देने से दिल्ली हाई कोर्ट ने इनकार कर दिया है. कोर्ट ने अर्सलान फिरोज अहेनगर की ओर से दायर जमानत याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि वह अपने प्रभाव से सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है.
जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैधनाथन शंकर की पीठ ने यह आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा 40 वर्षीय आरोपी अर्सलान फिरोज अहेनगर के खिलाफ प्रथम दृष्टया साक्ष्य पाए और कहा कि अर्सलान फिरोज अहेनगर ने आतंकवादियों की तस्वीरें पोस्ट की तथा लोगों को आतंकवादी कृत्यों को अंजाम देने के लिए उकसाने का आरोप है.
ऐसी स्थिति में यह नही कहा जा सकता कि उसके खिलाफ यह दिखाने के लिए कोई सबूत नही है की वह मारे गए आतंकवादी मेहरान यासीन शल्ला से करीबी था, और उससे जुड़ा हुआ था या उसने खुद आतंकवादी गतिविधियों में.सक्रिय रूप से हिस्सा लिया था.
अदालत ने यह टिप्पणी करते हुए अर्सलान की ओर से दायर जमानत याचिका को खारिज कर दिया है. अर्सलान ने निचली अदालत द्वारा सितंबर 2024 द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी. अर्सलान को 30 दिसंबर 2021 को गिरफ्तार किया गया था.
370 हटने के बाद आतंकी संगठनों ने बढ़ाई साजिशें: NIA
राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) ने आरोप लगाया है कि जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के बाद लश्कर-ए-तैयबा और टीआरएफ जैसे विभिन्न आतंकवादी संगठन अल्पसंख्यकों, सुरक्षा बलों, राजनीतिक हस्तियों और अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों को निशाना बनाकर हमले करने की साजिशें रच रहे थे.
इनमें से कुछ साजिशें कश्मीर और देश के अन्य हिस्सों में कथित तौर पर अशांति, अस्थिरता और भय पैदा करने के लिए रची गई थी और उन्हें अंजाम भी दिया गया था.
अर्सलान पर मेहरान यासीन शल्ला नामक व्यक्ति से जुड़े होने का आरोप है, जो टीआरएफ बया लश्कर के हिस्सा था. शल्ला दो अन्य व्यक्तियों के साथ 24 नवंबर 2021 को एक मुठभेड़ में मारा गया था.
-भारत एक्सप्रेस
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