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Delhi High Court: सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर की दोषसिद्धि के खिलाफ अपील पर फैसला रखा सुरक्षित, 23 साल पहले का है मामला

मेधा पाटकर ने उपराज्यपाल (एलजी) वीके सक्सेना की ओर से दाखिल मानहानि के मामले में दोषसिद्धि के खिलाफ हाईकोर्ट ने अपील दायर कर रखी है.

delhi high court

Delhi High Court: दिल्ली हाईकोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर की ओर से दायर अपील पर फैसला सुरक्षित रख लिया है. मेधा पाटकर ने उपराज्यपाल (एलजी) वीके सक्सेना की ओर से दाखिल मानहानि के मामले में दोषसिद्धि के खिलाफ हाईकोर्ट ने अपील दायर कर रखी है. जस्टिस शालिंदर कौर ने इसके साथ ही सभी पक्षकारों को इस मामले में अपना लिखित दलील 18 जुलाई तक दाखिल करने की अनुमति दे दी.

एलजी वीके सक्सेना ने यह मामला 23 साल पहले दाखिल किया था जब वह गुजरात में एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) के प्रमुख थे. नर्मदा बचाओ आंदोलन से जुड़ी 70-वर्षीय पाटकर ने सत्र अदालत के दो अप्रैल के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है.

सत्र अदालत ने मजिस्ट्रेट की अदालत की ओर से उन्हें दी गई सजा को बरकरार रखा था. मजिस्ट्रेट ने 1 जुलाई, 2024 को पाटकर को आईपीसी की धारा 500 (मानहानि) के तहत दोषी करार देते हुए पांच महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई थी और उन पर 10 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया था.

साकेत कोर्ट ने पाटकर को 8 अप्रैल को 25 हजार रुपए का परिवीक्षा बॉन्ड भरने पर अच्छे आचरण की परिवीक्षा पर रिहा कर दिया था और उन पर एक लाख रुपए का जुर्माना भरने की पूर्व शर्त भी लागू की थी. हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश में पाटकर की सजा को निलंबित कर दिया था और उन्हें 25 हजार रुपए के निजी मुचलके पर जमानत दे दी थी.


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-भारत एक्सप्रेस



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