Delhi High Court:दिल्ली हाईकोर्ट ने एक नाबालिग बच्ची के साथ बलात्कार और हत्या के आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने साफ कहा कि जनभावनाएं और मीडिया की रिपोर्टिंग किसी भी गंभीर अपराध की गंभीरता को कम नहीं कर सकतीं.
अदालत का तर्क: विश्वास को तोड़कर की गई क्रूरता
यह मामला वर्ष 2016 का है. आरोपी पर आरोप है कि उसने आठ साल की अपनी चचेरी बहन के साथ दुष्कर्म किया, फिर उसका गला घोंट कर हत्या कर दी. बाद में शव को प्लास्टिक की थैली में भरकर एक गड्ढे में छिपा दिया गया. अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में विश्वास का क्रूर उल्लंघन हुआ है, और यह आरोपी को राहत देने का आधार नहीं हो सकता.
जमानत याचिका में आरोपी का दावा
आरोपी ने जमानत की अर्जी में कहा कि वह जनदबाव और मीडिया ट्रायल का शिकार हुआ है. उसका दावा था कि उसे साजिश के तहत फंसाया गया है. न्यायमूर्ति गिरीश कथपालिया की पीठ ने कहा कि जमानत देते समय कोर्ट को अपराध की प्रकृति, उपलब्ध साक्ष्य और गंभीरता जैसे सभी पहलुओं को ध्यान में रखना पड़ता है. सिर्फ लंबी कैद को आधार बनाकर जमानत नहीं दी जा सकती.
ये भी पढ़ें: जामा मस्जिद के हरिहर मंदिर होने के दावे के मामले में आज होगी सुनवाई
गंभीर धाराओं में दर्ज है केस
आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 363 (अपहरण), 201 (सबूत मिटाना) और पॉक्सो एक्ट की धारा 6 (गंभीर यौन उत्पीड़न) के तहत केस दर्ज है. कोर्ट ने यह मानने से इनकार कर दिया कि आरोपी को सिर्फ मीडिया ट्रायल के कारण फंसाया गया है. सबूतों और अपराध की गंभीरता को देखते हुए, कोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी.
Follow Bharat Express on Instagram
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.



