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जामा मस्जिद के हरिहर मंदिर होने के दावे के मामले में आज होगी सुनवाई

Sambhal Jama Masjid: शाही जामा मस्जिद बनाम हरिहर मंदिर विवाद की सुनवाई आज चंदौसी स्थित सिविल जज (सीनियर डिवीजन) आदित्य कुमार सिंह की अदालत में होगी.

Sambhal Jama Masjid

Sambhal Jama Masjid: संभल जिले की बहुचर्चित शाही जामा मस्जिद बनाम हरिहर मंदिर विवाद की सुनवाई आज चंदौसी स्थित सिविल जज (सीनियर डिवीजन) आदित्य कुमार सिंह की अदालत में होगी. इस मामले को लेकर हिंदू पक्ष की ओर से दावा किया गया है कि यह मस्जिद असल में एक प्राचीन मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी. वहीं मुस्लिम पक्ष ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे ऐतिहासिक रूप से भ्रामक बताया है.

मामले में पहले मुस्लिम पक्ष ने इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं, लेकिन 19 मई 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा कराए जा रहे सर्वे को सही ठहराते हुए निचली अदालत में सुनवाई जारी रखने का आदेश दिया था.

क्या है विवाद?

संभल की जामा मस्जिद को लेकर हिंदू पक्ष का कहना है कि यह मस्जिद नहीं बल्कि हरिहर मंदिर है. जिसे मुगल शासक बाबर ने तोड़कर मस्जिद में बदला था. इस दावे को आधार देने के लिए 19वीं सदी के अंत में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा कराए गए एक सर्वे की रिपोर्ट का हवाला दिया जा रहा है.

एएसआई की पुरानी रिपोर्ट क्या कहती है?

1874–75 में किए गए इस सर्वे की रिपोर्ट 1879 में तैयार की गई थी. जिसकी अगुवाई एसईएल कार्ले नामक अधिकारी ने की थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि संभल की जामा मस्जिद के वास्तुशिल्प में कई असमानताएं हैं. जो इसे पारंपरिक इस्लामी निर्माण से अलग करती हैं.

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रिपोर्ट में मंदिर के वास्तु को लेकर विस्तार से बताया गया है. जैसे कि इसकी अलग-अलग लंबाई की विंग्स, गुंबदाकार केंद्रीय कक्ष और असमान चौड़ाई वाले मेहराब. इसके अलावा हिंदू पक्ष यह भी दावा करता है कि शिलालेख के पीछे मंदिर से संबंधित मूल हिंदू अभिलेख मौजूद हो सकते हैं.

मुस्लिम पक्ष का क्या कहना है?

मुस्लिम पक्ष का तर्क है कि यह मस्जिद बाबर के समय की नहीं है, बल्कि उससे पहले मोहम्मद बिन तुगलक के शासन काल में बनवाई गई थी. उनका कहना है कि बाबर ने यहां केवल जीर्णोद्धार का कार्य कराया था निर्माण नहीं. वे यह भी कहते हैं कि बाबर के नाम वाला शिलालेख एक ऐतिहासिक साक्ष्य है. जिसे झूठा करार देना सही नहीं है.

आज की सुनवाई क्यों अहम?

इस मामले में अदालत द्वारा सर्वे कराए जाने के आदेश के बाद से ही यह मुद्दा संवेदनशील हो गया है. आज की सुनवाई यह तय करेगी कि निचली अदालत में किस दिशा में कार्यवाही आगे बढ़ेगी. चूंकि मामला धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक दावों से जुड़ा है. लिहाजा सभी पक्षों की नजरें चंदौसी अदालत की कार्यवाही पर टिकी हुई हैं.

– भारत एक्सप्रेस



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