दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार और सीबीएसई को ऐसे डमी स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है जो कथित तौर पर छात्रों को कक्षाओं में उपस्थित हुए बिना परीक्षा देने की सुविधा देते हैं. मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने इसे धोखाधड़ी बताया और कहा कि ऐसे स्कूल छात्रों को केवल कोचिंग कक्षाओं में उपस्थित होने और बिल्कुल गलत सूचना के आधार पर परीक्षा देने की अनुमति नहीं दे सकते.
पीठ ने कहा यह देखा गया है कि छात्र स्कूलों में कक्षाओं में उपस्थित नहीं होते हैं बल्कि कोचिंग सेंटरों में समय बिताते हैं. हालांकि उन्हें शिक्षा बोर्डों द्वारा परीक्षा देने की अनुमति दी जाती है, जहां उन्हें अपेक्षित न्यूनतम उपस्थिति दर्ज करानी होती है. पीठ ने सरकार और सीबीएसई को इस संबंध में निरीक्षण करने का निर्देश दिया है. अदालत ने ऐसे स्कूलों का संज्ञान लिया, जिनका उपयोग अन्य राज्यों के छात्रों को दिल्ली के निवासी होने का लाभ देने के लिए किया जा रहा है और ऐसे स्कूलों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर दिल्ली सरकार और सीबीएसई से हलफनामा मांगा है.
डमी स्कूल की कोई अवधारणा नहीं
न्यायालय ने एक जनहित याचिका पर यह निर्देश दिया. सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि डमी स्कूल की कोई अवधारणा नहीं है और दावा किया कि फर्जी दाखिले के मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है और गलत तरीके से पेश किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि स्कूलों को अपने संबद्धता नियमों का पालन करना अनिवार्य है, ऐसा न करने पर उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाती है और अधिकारियों के पास किसी भी डमी स्कूल के बारे में कोई शिकायत नहीं है. सीबीएसई के वकील ने कहा कि देश भर में 300 से अधिक डमी स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की गई है.
पीठ ने कहा अधिकारी ऐसे स्कूलों को कुछ भी कह सकते हैं, साथ ही दिल्ली सरकार के वकील से कथित फर्जी दाखिलों पर भी राज्य शिक्षा विभाग द्वारा की गई कार्रवाई पर सवाल उठाया. इस पर वकील ने कहा कि दो मामलों में कार्रवाई शुरू की गई थी.
पीठ ने राज्य सरकार और सीबीएसई के वकील से अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया जिसमें ‘डमी’ स्कूलों के बारे में कोई भी जानकारी मिलने पर की गई कार्रवाई का विवरण दिया गया हो.
दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि कोचिंग सेंटरों द्वारा ऐसे स्कूलों का उपयोग राजस्थान के कोटा में पढ़ने वाले छात्रों पर आधारित एक वेब-सीरीज में भी दिखाया गया था. अदालत ने कहा ऐसा लगता है कि आपके विभाग ने इसे नहीं देखा है.
याचिकाकर्ता राजीव अग्रवाल ने डीएसक्यू के तहत एमबीबीएस या बीडीएस सीटें देने के लिए डीयू और गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय द्वारा लागू पात्रता मानदंड को चुनौती दी. उन्होंने दावा किया कि डमी स्कूलों ने छात्रों को यह दिखाने के लिए एक आभासी मंच प्रदान किया कि वे कक्षा 10 की परीक्षा पास करने के बाद दिल्ली चले आए थे, जिसका एकमात्र उद्देश्य किसी तरह दिल्ली राज्य कोटा सीटों का लाभ उठाना था, जो अन्यथा दिल्ली के एनसीटी के वास्तविक निवासियों के बीच आवंटित की जानी चाहिए.
-भारत एक्सप्रेस
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