दिल्ली हाई कोर्ट ने ऑपरेशन बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर में अहम योगदान देने वाली विंग कमांडर निकिता पांडेय की सेवा समाप्त करने के वायु सेना के फैसले पर लगी रोक को बढ़ा दिया है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी सेवा समाप्त करने के फैसले पर रोक लगा दी थी. कोर्ट ने अब केंद्र सरकार सहित अन्य पक्षों से एक सप्ताह में जवाब मांगा है. अदालत इस मामले में अगली सुनवाई जुलाई में करेगी.
स्थायी कमीशन से किया था इनकार; निकिता पांडेय हैं एक्सपर्ट फाइटर कंट्रोलर
निकिता पांडेय को वायु सेना ने स्थायी कमीशन (Permanent Commission) देने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने पिछले साल सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. तब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के फैसले पर रोक लगा दी थी.
मामले की सुनवाई के दौरान निकिता पांडेय की ओर से पेश वकील ने सुप्रीम कोर्ट में दलील देते हुए कहा था कि विंग कमांडर निकिता पांडेय एक एक्सपर्ट फाइटर कंट्रोलर हैं और उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर और ऑपरेशन बालाकोट के दौरान मैनेज्ड इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम में विशेषज्ञ के रूप में काम किया था. इसके बाद शीर्ष अदालत ने उन्हें आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल (AFT) या दिल्ली हाई कोर्ट का रुख करने की स्वतंत्रता दी थी.
नीति में सुधार की जरूरत: सुप्रीम कोर्ट
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा था कि अधिकारियों के सामने अपने दीर्घकालिक करियर की संभावनाओं को लेकर अनिश्चितता की स्थिति चिंताजनक है, इसलिए एक अपडेटेड नीति के जरिए अधिकारियों की इन चिंताओं को दर्ज किया जाना चाहिए. विंग कमांडर निकिता पांडेय शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) के जरिए भारतीय वायु सेना में भर्ती हुई थीं.
अदालत ने यह भी कहा था कि शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारियों के लिए कठिन जीवन उनकी भर्ती के बाद शुरू होता है, जिसमें उन्हें स्थायी कमीशन देने के लिए 10 या 15 साल बाद कुछ प्रोत्साहन देने की बात कही गई थी. कोर्ट ने कहा था कि अनिश्चितता की यह भावना सशस्त्र बलों के लिए अच्छी नहीं हो सकती है; यह एक आम आदमी का सुझाव है, क्योंकि हम विशेषज्ञ नहीं हैं.
ये भी पढ़ें: ‘Hello..मैं रागा का सचिव’, राहुल गांधी के नाम पर ठगी, कैसे लुट गए हरियाणा के कांग्रेस नेता?
पूर्व में भी महिला अफसरों को मिल चुकी है मदद
निकिता पांडेय पहली ऐसी अधिकारी हैं जिनकी सेवा से हटाए जाने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा रखी है. हालांकि, इससे पहले वर्ष 2025 में थल सेना की 50 से ज्यादा एसएससी (SSC) महिला अधिकारियों को भी कोर्ट से ऐसी ही राहत मिल चुकी है.
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.


